जमुई को 4,000 करोड़ की सौगात, चकाई में एशिया के बड़े इथेनॉल प्लांट का सीएम सम्राट ने किया निरीक्षण
जमुई। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को जमुई जिले के चकाई प्रखंड में निर्माणाधीन अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड के इथेनॉल प्लांट का निरीक्षण किया। करीब 4,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निरीक्षण के दौरान परिवहन मंत्री दामोदर रावत और उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह भी मौजूद रहीं।
मुख्यमंत्री ने प्लांट के निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि बिहार में उद्योगों का विस्तार हो रहा है और जमुई में भी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य सीमावर्ती जिलों में बड़े उद्योग स्थापित कर पलायन रोकना और स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है।
अधिकारियों के अनुसार, प्लांट का निर्माण करीब 105 एकड़ जमीन पर किया जा रहा है। इसकी उत्पादन क्षमता 1,000 किलोलीटर प्रतिदिन होगी, जिससे प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया जा सकेगा। प्लांट में 20 मेगावाट का कैप्टिव पावर प्लांट भी प्रस्तावित है।
परियोजना में स्थानीय किसानों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में अनाज की खरीद की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक प्लांट को रोजाना करीब 30,000 क्विंटल अनाज की आवश्यकता होगी, जिससे किसानों को उनके उत्पाद के लिए स्थायी बाजार मिलने की उम्मीद है। प्लांट में पर्यावरण संरक्षण के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली भी अपनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से 5,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं जमुई में विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के जरिए करीब 3,400 करोड़ रुपये के निवेश और 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की जानकारी भी समीक्षा बैठक में दी गई।
मुख्यमंत्री ने चकाई में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए चिन्हित जमीन का हवाई निरीक्षण भी किया। उन्होंने अधिकारियों को जमीन की मैपिंग और औद्योगिक क्षेत्र के विकास की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया। साथ ही लछुआड़ मंदिर और गढ़ी डैम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने तथा जिले में कानून-व्यवस्था और सड़क व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को स्किल्ड मैनपावर का हब बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है और औद्योगिक निवेश के जरिए राज्य को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्लांट से मार्च 2027 तक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।