डीजल बिक्री के नियमों में बड़ा बदलाव: एक ग्राहक को 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं, कॉमर्शियल उपभोक्ताओं पर असर
नई दिल्ली। डीजल की खुदरा बिक्री को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं, जिनका सीधा असर बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है। नए प्रावधानों के अनुसार अब किसी एक ग्राहक को रिटेल पेट्रोल पंप से एक बार में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही बड़े कॉमर्शियल उपभोक्ता सामान्य पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं खरीद सकेंगे।
सरकारी निर्देशों के तहत भारी मात्रा में डीजल की खपत करने वाले उद्योग, निर्माण कंपनियां, खनन इकाइयां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अब अधिकृत थोक विक्रेताओं या विशेष आपूर्ति चैनलों के माध्यम से ही डीजल खरीदना होगा। इसका उद्देश्य ईंधन वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और खुदरा व थोक बिक्री के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित करना बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन व्यवसायों पर पड़ेगा जो अब तक रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदते थे। नए नियमों के बाद उन्हें थोक बाजार से ईंधन लेना होगा, जहां कीमतें खुदरा दरों की तुलना में अधिक हो सकती हैं।
जानकारी के मुताबिक, कॉमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए डीजल की कीमत खुदरा दरों की तुलना में करीब 40 रुपये प्रति लीटर तक अधिक पड़ सकती है। इससे परिवहन, निर्माण, कृषि से जुड़े बड़े ऑपरेटरों और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि बढ़ी हुई ईंधन लागत का असर माल ढुलाई और उत्पादन खर्च पर पड़ सकता है। वहीं सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था ईंधन वितरण प्रणाली को व्यवस्थित करने और अनधिकृत बड़े पैमाने की खरीद पर नियंत्रण लगाने में मददगार साबित होगी।
हालांकि, आम उपभोक्ताओं और निजी वाहनों के लिए डीजल खरीदने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वे पहले की तरह खुदरा पेट्रोल पंपों से अपनी आवश्यकता के अनुसार ईंधन खरीद सकेंगे।
नए नियमों को लेकर विभिन्न उद्योग संगठनों और परिवहन क्षेत्र की निगाहें सरकार की अगली अधिसूचनाओं पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इनके प्रभाव का दायरा देशभर के लाखों व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट: अनिरुद्ध नारायण | TWM News Bihar