मॉडल स्कूलों की व्यवस्था अब अफसरों के जिम्मे, हर विद्यालय के लिए नियुक्त होगा एक अधिकारी: सम्राट चौधरी
पटना। बिहार के सरकारी मॉडल स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ‘वन ऑफिसर-वन मॉडल स्कूल’ व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत प्रत्येक मॉडल स्कूल की जिम्मेदारी एक अधिकारी को सौंपी जाएगी, जो विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और समस्याओं की नियमित निगरानी करेंगे।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को पटना स्थित लोक सेवक आवास में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की उपस्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता और शैक्षणिक गतिविधियों की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। अधिकारियों को विद्यालयों का औचक निरीक्षण करने और दैनिक गतिविधियों की रिपोर्ट जिला एवं मुख्यालय स्तर पर उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।
हर तीन महीने में होगी अभिभावक-शिक्षक बैठक
सम्राट चौधरी ने मॉडल स्कूलों में प्रत्येक तीन महीने पर अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) आयोजित करने को कहा। उन्होंने विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों से भी संवाद बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि उनके अनुभव और उपलब्धियों का लाभ वर्तमान विद्यार्थियों को मिल सके।
JEE-NEET की तैयारी पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर मार्गदर्शन और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए गुणवत्तापूर्ण तैयारी का समान अवसर मिलना चाहिए।
डिजिटल शिक्षा को बनाया जाएगा प्रभावी
बैठक में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के ई-लर्निंग और 24×7 इंटरैक्टिव डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म को और प्रभावी बनाने तथा इसकी पहुंच अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी विद्यालय की गुणवत्ता का आकलन केवल उसके भवन और आधारभूत सुविधाओं से नहीं, बल्कि शिक्षण की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से भी होना चाहिए। सरकार का लक्ष्य मॉडल स्कूलों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विशिष्ट मानकों वाले संस्थान के रूप में विकसित करना है।