कला-कौशल से कूटनीति तक: पीएम मोदी के उपहारों ने दुनिया में बिखेरी भारतीय संस्कृति की छटा

By अनिरुद्ध नारायण, इंटर्न

नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया विदेश यात्राओं के दौरान पारंपरिक भारतीय उपहारों के माध्यम से “सांस्कृतिक कूटनीति” (Cultural Diplomacy) को एक नई पहचान दी है। ‘कलमकारी’ से लेकर ‘कश्मीरी सिल्क’ तक, उनके द्वारा दिए गए उपहारों ने वैश्विक मंच पर भारत की समृद्ध विरासत और शिल्पकला को प्रमुखता से स्थापित किया है।

विदेशी दौरों में पीएम मोदी ने विभिन्न देशों के नेताओं को भारत के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प से जुड़े उपहार भेंट किए। इन उपहारों में कलमकारी पेंटिंग, कश्मीरी शॉल, पारंपरिक सिल्क वस्त्र और आयुर्वेद से जुड़े ग्रंथ शामिल रहे, जो भारत की प्राचीन संस्कृति और ज्ञान परंपरा का प्रतीक हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल औपचारिक उपहार नहीं, बल्कि भारत की “सॉफ्ट पावर” को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक रणनीतिक प्रयास है। हर उपहार को संबंधित देश और नेता की रुचि के अनुसार चुना गया, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में सांस्कृतिक जुड़ाव और गहराई आई है।

हाल के वर्षों में पीएम मोदी की यह पहल लगातार चर्चा में रही है। इटली, स्वीडन, नॉर्वे और यूएई जैसे देशों के नेताओं को दिए गए उपहारों में मगा सिल्क, मधुबनी पेंटिंग, पिचवाई कला और पारंपरिक हस्तशिल्प शामिल रहे हैं, जो भारत की विविधता और कारीगरों की प्रतिभा को दर्शाते हैं।

कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की पहल न केवल भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक मंच पर देश की छवि को भी सुदृढ़ बनाती है। पीएम मोदी के ये उपहार भारतीय कला, परंपरा और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की “गिफ्ट डिप्लोमेसी” ने यह साबित कर दिया है कि कूटनीति केवल राजनीतिक और आर्थिक समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृति और परंपरा भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है।

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