टीएमसी में बगावत तेज: 22 सांसदों का दावा, अलग संसदीय समूह बनाने की तैयारी

लोकसभा स्पीकर से मान्यता मांगने दिल्ली पहुंचे बागी सांसद, ममता बनर्जी के नेतृत्व पर बढ़ा संकट

अनिरुद्ध नारायण (इंटर्न)

नई दिल्ली/कोलकाता:
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी कलह अब बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेती नजर आ रही है। पार्टी के बागी सांसदों ने दावा किया है कि उनके साथ अब 22 लोकसभा सांसदों का समर्थन है और वे जल्द ही एक अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता पाने के लिए कदम उठाने वाले हैं।

बागी गुट की अगुवाई कर रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि वे दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग ब्लॉक के रूप में मान्यता की मांग करेंगे। उनके अनुसार, “अब हमारे साथ 22 सांसद हैं और हम अपनी पहचान अलग समूह के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।”

सूत्रों के मुताबिक, यह बगावत पहले 19 और फिर 20 सांसदों के समर्थन के दावे से शुरू हुई थी, लेकिन अब संख्या बढ़कर 22 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है, जिससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव और बढ़ गया है।

राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को टीएमसी के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। लोकसभा में पार्टी के कुल 28 सांसद हैं और यदि 22 सांसद बागी खेमे में चले जाते हैं, तो यह दो-तिहाई से अधिक संख्या होगी, जो पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकती है।

हालांकि, इस पूरे मामले पर संवैधानिक पेच भी सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अलग समूह बनाने से दलबदल कानून से राहत नहीं मिलती, क्योंकि इसके लिए औपचारिक विलय जरूरी होता है।

इस बीच, टीएमसी नेतृत्व ने बागी सांसदों के दावों को चुनौती दी है और पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की कोशिशें तेज कर दी हैं। लेकिन लगातार बढ़ती बगावत ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है और आने वाले दिनों में यह मामला और राजनीतिक रूप ले सकता है।

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