तकनीकी आत्मनिर्भरता से तय होगी भारत की वैश्विक भूमिका: राजनाथ सिंह
अनिरुद्ध नारायण, इंटर्न

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आने वाले समय में वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका उसकी आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता पर निर्भर करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में किसी भी राष्ट्र की शक्ति केवल उसके संसाधनों से नहीं, बल्कि उसकी नवाचार क्षमता और स्वदेशी तकनीक पर आधारित होती है।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ का अर्थ दुनिया से अलग-थलग होना नहीं है, बल्कि वैश्विक समुदाय के साथ समान भागीदारी के रूप में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से रक्षा निर्माण और तकनीकी विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और आयातक देश से निर्यातक देश बनने की दिशा में काम कर रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की वैश्विक व्यवस्था में वही देश प्रभावशाली भूमिका निभाएंगे, जो उन्नत तकनीकों—जैसे सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा नवाचार—में आत्मनिर्भर होंगे। उन्होंने इस दिशा में अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, जैसे आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव, ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाहरी निर्भरता किसी भी देश के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती है। ऐसे में भारत को अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत करना होगा।

रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि सरकार की नीतियों, उद्योगों की भागीदारी और स्टार्टअप इकोसिस्टम के सहयोग से भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरेगा।

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