भारत की देसी बुलेट ट्रेन का सपना जल्द होगा साकार, B28 का ‘स्क्वीज टेस्ट’ अंतिम चरण में; 2027 में ट्रायल की तैयारी

नई दिल्ली। भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन अब हकीकत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। बेंगलुरु स्थित भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) के कारखाने में तैयार हो रही B28 ट्रेन के पहले कोच का ‘स्क्वीज टेस्ट’ अंतिम चरण में पहुंच गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को निर्माण इकाई का दौरा कर परीक्षण की प्रगति का जायजा लिया। रेलवे के अनुसार, यह परीक्षण अगले सप्ताह पूरा होने की उम्मीद है।

क्या होता है स्क्वीज टेस्ट?

स्क्वीज टेस्ट ट्रेन के कोच की संरचनात्मक मजबूती जांचने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें कोच की बॉडी पर नियंत्रित दबाव और बाहरी बल डालकर यह देखा जाता है कि दुर्घटना या अत्यधिक दबाव की स्थिति में उसका ढांचा कितना सुरक्षित रह सकता है।

इस परीक्षण के सफल होने के बाद ट्रेन में प्रोपल्शन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए जाएंगे। इसके बाद अत्यधिक गर्मी, ठंड, धूल और भारी बारिश जैसी परिस्थितियों में ट्रेन की क्षमता जांचने के लिए क्लाइमेट टेस्ट किया जाएगा।

249 किलोमीटर प्रति घंटे होगी परिचालन गति

स्वदेशी B28 बुलेट ट्रेन को अधिकतम 249 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए तैयार किया जा रहा है। इसकी परीक्षण गति 275 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित है। आठ कोच वाली इस ट्रेन में एक बार में 557 यात्रियों के सफर करने की क्षमता होगी। जरूरत पड़ने पर दो ट्रेन सेट जोड़कर 16 कोच की ट्रेन भी चलाई जा सकेगी।

2027-28 में शुरू हो सकता है ट्रायल

रेलवे की योजना के अनुसार, ट्रेन का ट्रायल 2027-28 की पहली तिमाही में अहमदाबाद-मुंबई हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के सूरत-वापी खंड पर शुरू किया जा सकता है। इस करीब 100 किलोमीटर लंबे हिस्से को शुरुआती परीक्षण के लिए चुना गया है।

रेलवे ने इस स्वदेशी ट्रेन का व्यावसायिक संचालन अगस्त 2027 से शुरू करने का लक्ष्य बताया है। हालांकि, यह समयसीमा परीक्षण और अन्य तैयारियों की प्रगति पर निर्भर करेगी।

BEML बना रही है पहली दो ट्रेनें

भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी BEML पहली दो स्वदेशी बुलेट ट्रेन का निर्माण कर रही है। प्रत्येक ट्रेन में आठ कोच होंगे। इनका इस्तेमाल मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना के लिए किया जाना है।

पूरे 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। गुजरात खंड को इससे पहले दिसंबर 2027 तक तैयार करने की योजना है।

स्वदेशी तकनीक से हाईस्पीड रेल को मिलेगी नई पहचान

B28 परियोजना भारत में हाईस्पीड रेल तकनीक और स्वदेशी विनिर्माण क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप तेज रफ्तार ट्रेन विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

अब सबकी नजर स्क्वीज टेस्ट के पूरा होने, प्रोटोटाइप तैयार होने और अगले साल होने वाले ट्रायल पर है। यदि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षण सफल होते हैं, तो भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का सपना जल्द पटरी पर उतर सकता है।

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