नेपाल में सोशल मीडिया बैन पर बवाल: 9 की मौत, 80 से अधिक घायल

काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोशल मीडिया बैन को लेकर भड़के युवा प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया। झड़पों में अब तक 9 लोगों की मौत हो गई है और 80 से ज्यादा घायल हुए हैं। हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने कर्फ्यू लागू कर दिया है और सेना को तैनात करना पड़ा है।

जानकारी के अनुसार, गुस्साए प्रदर्शनकारी संसद भवन परिसर में घुस गए और प्रतिबंधित क्षेत्रों में तोड़फोड़ की। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने रबर की गोलियां, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। वहीं प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर पानी की बोतलें और डंडे फेंके।

संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू

काठमांडू जिला प्रशासन ने पहले बनिश्वर इलाके में कर्फ्यू लगाया था, जिसे अब बढ़ाकर राष्ट्रपति भवन (शीतल निवास), उपराष्ट्रपति आवास, सिंहदरबार और प्रधानमंत्री निवास बलुवाटार जैसे हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों तक कर दिया गया है।
मुख्य जिला अधिकारी छबिलाल रिजाल ने बताया कि कर्फ्यू दोपहर 12:30 बजे से रात 10 बजे तक लागू रहेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस या आवाजाही पर रोक होगी।

पत्रकार भी घायल

हिंसक झड़पों में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें पत्रकार श्याम श्रेष्ठा (कांतिपुर टीवी) भी शामिल हैं। उन्हें रबर की गोली लगी और वर्तमान में सिविल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

काठमांडू से बाहर भी फैला आंदोलन

राजधानी के साथ-साथ पोखरा और दमक में भी विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पोखरा में प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में तोड़फोड़ की, वहीं दमक—जो प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का गृह क्षेत्र है—वहां भी हिंसा की घटनाएं सामने आईं। हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री ओली ने आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई है।

असल वजह: सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार

सरकार द्वारा 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जिनमें फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (ट्विटर) शामिल हैं, पर रोक लगाए जाने के बाद युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा। सरकार का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसमें इन कंपनियों को नेपाल में रजिस्ट्रेशन कराने, शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करने और स्थानीय संपर्क सूत्र बनाने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि, युवाओं का कहना है कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। 24 वर्षीय छात्र युवजन राजभंडारी का कहना था—“सोशल मीडिया बैन तो बस चिंगारी है, असल कारण नेपाल में फैला संस्थागत भ्रष्टाचार है।” वहीं 20 वर्षीय छात्रा इक्षमा तुमरोक ने कहा—“हम इस तानाशाही रवैये को खत्म करना चाहते हैं। बदलाव अब हमारी पीढ़ी से ही शुरू होगा।”

टिक-टॉक वीडियो बने गुस्से का जरिया

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार भ्रष्टाचार और नेताओं की शानो-शौकत को छिपाने के लिए सोशल मीडिया बंद कर रही है। टिक-टॉक पर वायरल वीडियो में जहां आम लोगों की बदहाली दिखाई गई, वहीं दूसरी तरफ राजनेताओं के बच्चों की आलीशान जीवनशैली ने जनता का गुस्सा और भड़का दिया।

सरकार का बचाव

सरकार ने बयान जारी कर कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करती है और सुरक्षित ऑनलाइन माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले भी नेपाल सरकार ने टेलीग्राम और टिक-टॉक पर रोक लगाई थी, हालांकि बाद में टिक-टॉक पर से प्रतिबंध हट गया था

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *