लालकिला धमाके की साजिश में यूपी की महिला डॉक्टर गिरफ्तार, आतंकी मॉड्यूल से जुड़े तार हुए बेनकाब
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दिल्ली के लालकिला के बाहर हुए कार धमाके की जांच अब एक बड़े आतंकी मॉड्यूल तक पहुंच चुकी है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक महिला डॉक्टर शाहीन सईद (40) को गिरफ्तार किया गया है, जो अब जांच एजेंसियों के रडार पर ‘मुख्य साजिशकर्ता’ के रूप में उभरी हैं। शाहीन अलीगढ़ की रहने वाली हैं और हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी हुई थीं।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, शाहीन सईद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसर गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़ी हुई थीं। इन्हें पाकिस्तान से निर्देश मिल रहे थे कि वे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक ‘सेफ बेस’ तैयार करें और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई चैन को मजबूत करें।

सूत्रों के अनुसार, शाहीन के वाहन से एक असॉल्ट राइफल बरामद की गई है। बताया जा रहा है कि यह वही कार थी जिससे विस्फोटक सामग्री दिल्ली तक पहुंचाई गई थी। शाहीन की करीबी दोस्त डॉ. मोजमिल अहमद गनई (पुलवामा) और अदील (कुलगाम) को भी पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ये तीनों डॉक्टर अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे और इन्हें फरीदाबाद और यूपी के अलग-अलग इलाकों से हिरासत में लिया गया।

अब तक कुल आठ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें पांच जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। इनके कब्जे से 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट भी शामिल है, जब्त की गई है। अधिकारियों के अनुसार, यह बरामदगी लालकिला धमाके से कुछ घंटे पहले की गई थी, जिसने अब इस केस को एक अंतर-राज्यीय आतंकी नेटवर्क में बदल दिया है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि शाहीन सईद को ‘जमात-उल-मोमिनात’ नामक महिला विंग की स्थापना का जिम्मा दिया गया था, जिसका मकसद शिक्षित महिलाओं और पेशेवरों को आतंकी नेटवर्क में शामिल करना था।

सरकारी सूत्रों ने बताया, “शुरुआत में हमें अंदाजा नहीं था कि यह नेटवर्क इतना बड़ा है। लेकिन जब मौलवी मोहम्मद इश्तियाक के घर से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद हुए, तब जाकर इस साजिश का पूरा आकार सामने आया। इश्तियाक हरियाणा के मेवात निवासी है और अल-फलाह कॉलेज में क्लरिक के तौर पर काम कर रहा था।”

गौरतलब है कि 10 नवंबर को फरीदाबाद से मिली विस्फोटक सामग्री के बाद एजेंसियों ने रेड अलर्ट जारी कर दिया था। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि लालकिला कार ब्लास्ट महज एक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आतंकी अभियान का हिस्सा था, जिसमें देश के कई हिस्सों से जुड़े लोग शामिल थे।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का फंडिंग स्रोत क्या था और क्या इसका कोई अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सीधे पाकिस्तान स्थित संगठनों से जुड़ा हुआ है।

 

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