भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन, परिवार का अल्टीमेटम
एफआईआर के बाद भी कार्रवाई धीमी, न्याय की मांग तेज; राजनीतिक विवाद गहराया
अनिरुद्ध नारायण, इंटर्न
पटना/भोजपुर:
बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मृतक के परिजनों ने प्रशासन को साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सात दिनों के भीतर दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे व्यापक आंदोलन करेंगे।
दरअसल, 17 जून को हुए इस कथित एनकाउंटर में सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद से ही मामला लगातार गरमाया हुआ है। परिजनों का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था और तिवारी ने पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था।
FIR दर्ज, लेकिन परिवार असंतुष्ट
मामले में मृतक की मां की शिकायत पर कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें तत्कालीन SDPO, SHO समेत अन्य पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं।
हालांकि, परिवार का कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज होना पर्याप्त नहीं है, जब तक दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं होती।
7 दिन का अल्टीमेटम, पंचायत से आंदोलन की तैयारी
परिजनों ने प्रशासन को सात दिन की समयसीमा दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में न्याय नहीं मिला, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर पंचायत और जनसभा की भी तैयारी की जा रही है
न्यायिक जांच के आदेश, फिर भी उठ रहे सवाल
राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की जा रही है।
राजनीतिक रंग भी गहराया
यह मामला अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। विभिन्न दलों और नेताओं ने इसे लेकर सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्ताधारी दल ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि न्याय, जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले सात दिन इस केस की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।