राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- ‘वोट चोरी’ संविधान पर सीधा हमला
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि देश में चुनावी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
‘वोट चोरी’ को बताया संविधान पर हमला
राहुल गांधी ने बुधवार को एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कथित ‘वोट चोरी’ को भारतीय नागरिकों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला बताया था। उन्होंने भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग के भीतर भी मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
‘एंटी-इनकंबेंसी कहां चली गई?’
राहुल गांधी ने चुनावी राजनीति में सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी-इनकंबेंसी का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के लगातार चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि दूसरे नेताओं और सरकारों के खिलाफ दिखाई देने वाली सत्ता विरोधी लहर यहां क्यों नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि वह इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं।
2024 के चुनावों पर भी सवाल
राहुल गांधी ने अपने आरोपों को 2024 के लोकसभा चुनावों और विभिन्न विधानसभा चुनावों तक जोड़ा। उन्होंने चुनावों में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग की और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के खिलाफ भी जांच की बात कही।
चुनाव आयोग और भाजपा पर राजनीतिक विवाद
राहुल गांधी के आरोपों के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं, भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें राजनीतिक आरोप बताया है। ऐसे में मतदाता सूची, एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना है।