नई दिल्ली
भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया है। यह विवाद खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर उत्पन्न हुआ है, जिसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के उच्चायोग के अधिकारियों को निष्कासित कर दिया है।
कनाडा ने सोमवार को छह भारतीय राजनयिकों को निष्कासित कर दिया, यह आरोप लगाते हुए कि इन अधिकारियों का संबंध भारतीय एजेंटों द्वारा कनाडाई नागरिकों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कनाडा के छह राजनयिकों को दिल्ली से वापस भेजने का फैसला किया।
कनाडाई विदेश मंत्री का बयान
कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “कनाडा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने नागरिकों की सुरक्षा है। भारतीय अधिकारियों को निष्कासित करने का निर्णय आरसीएमपी (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) द्वारा प्राप्त स्पष्ट और ठोस साक्ष्यों के आधार पर लिया गया है। हम भारतीय सरकार से अपील करते हैं कि वह निज्जर मामले की जांच में सहयोग करे, क्योंकि यह दोनों देशों के हित में है।”
निज्जर हत्या और जांच
खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की जून 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मई 2024 में, कनाडाई जांच एजेंसी आरसीएमपी ने हत्या में कथित रूप से शामिल चार लोगों को गिरफ्तार किया। इसके बाद जांच में भारतीय अधिकारियों के शामिल होने के प्रमाण मिले, जिसके आधार पर कनाडा ने कूटनीतिक कार्रवाई की।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने कनाडाई सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें “बेतुका” बताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय निराधार और अविश्वसनीय तथ्यों पर आधारित है। साथ ही, भारत ने अपने उच्चायुक्त और अन्य अधिकारियों को कनाडा से वापस बुलाने की घोषणा की।
कूटनीतिक संबंधों पर असर
भारत और कनाडा के बीच 75 वर्षों से प्रगाढ़ कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। लेकिन निज्जर मामले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद से दोनों देशों के संबंधों में खटास आई है।
कनाडा ने स्पष्ट किया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा और भारत के साथ बातचीत जारी रखेगा।