जमालपुर
बाबा नगर के अमझर कोलकाली में स्थित आनंद सम्भूति मास्टर यूनिट के आध्यात्मिक केंद्र में आज रीनासां आर्टिस्ट्स और राइटर्स एसोसिएशन के बैनर तले एक भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रकृति के सुरम्य आंचल में बसे इस केंद्र में सामूहिक साधना के उपरांत एक प्रभात संगीत आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें भक्ति और योग की भावनाएं बहती रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्रद्धेय पुरोधा प्रमुख के आगमन पर ‘मानव धर्म एक है’ के गगनभेदी नारों से हुआ। पुरोधा प्रमुख ने बाबा श्री श्री आनंदमूर्त्ति जी की प्रतिकृति पर माल्यार्पण कर श्रद्धा अर्पित की। समारोह में विशेष रूप से आचार्य मेघदीपानंद अवधूत, सेक्टोरियल धर्म प्रचार सचिव, और भुक्ति प्रधान श्री ब्रजेश जी उपस्थित थे जिन्होंने पुरोधा प्रमुख का स्वागत किया। इसके बाद सेवा धर्म मिशन और महिला विभाग की ओर से कौशिकी एवं तांडव नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर आचार्य जगदातमानंद अवधूत ने प्रभात संगीत के विभिन्न गीत प्रस्तुत किए, जिनका अंग्रेजी, हिंदी और बांग्ला में अनुवाद क्रमशः आचार्य विमलानंद, श्री प्रदुमन्न और श्री दिनेश घोष ने किया। भारत के विभिन्न प्रांतों के अलावा नेपाल, बांग्लादेश और अन्य देशों से आए हजारों साधकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और योग के गूढ़ अर्थों को समझने का प्रयास किया।

इस दौरान आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने “योग” पर विस्तार से चर्चा करते हुए कठोपनिषद के श्लोक का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और मन लगाम की तरह है, जिसे साध कर जीवात्मा परमात्मा की ओर अग्रसर होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योग का पारंपरिक अर्थ केवल “चित्तवृत्ति का निरोध” नहीं है, जैसा कि महर्षि पतंजलि ने कहा था, बल्कि यह एक गहरी अवस्था है जहां जीवात्मा और परमात्मा एकाकार होते हैं।
उन्होंने तंत्र की परिभाषा का उल्लेख करते हुए कहा, “संयोगो योगो इत्युक्तो जीवात्मा-परमात्मानः।” उन्होंने उदाहरण दिया कि असली योग वह है जब चीनी पूरी तरह से पानी में घुलकर मीठा बना देती है। इस मिलन को ही एकीकरण कहा जा सकता है। योग का उद्देश्य भी इसी तरह जीवात्मा का परमात्मा से अभिन्न रूप में मिलन है।
इस आध्यात्मिक चर्चा और भक्ति गीतों से वातावरण पूर्णतया भक्तिमय हो गया, और श्रोतागण भक्ति योग के माध्यम से भाव विभोर हो उठे।