बेघरों ने उठाई आवाज़: “कब मिलेगा अपना घर?”—नगर परिषद कार्यालय में फार्म जमा कर निकाला पैदल मार्च

जमालपुर | संवाददाता
शहर के शहरी बेघरों की वर्षों पुरानी पीड़ा अब आंदोलन का रूप ले चुकी है। सोमवार को नगर परिषद जमालपुर क्षेत्र के सैकड़ों बेघर परिवारों ने “आख़िर कब मिलेगा घर?” मुहिम के तहत नगर परिषद कार्यालय में योजना से जुड़ा फार्म भरकर आवाज़ बुलंद की। भारी संख्या में महिलाएं इस आंदोलन में शामिल रहीं, जिन्होंने फार्म जमा करने के बाद पैदल मार्च करते हुए अंचल कार्यालय का घेराव किया।

प्रदर्शनकारी महिलाएं मुख्य रूप से रामपुर कॉलोनी, डीजल शेड, डीह जमालपुर, सदर बाजार, खलासी मोहल्ला, मोहनपुर और केशोपुर इलाकों से थीं। फार्म जमा करने के बाद सभी महिलाएं नारों के साथ अंचल कार्यालय पहुंचीं और वहां अंचलाधिकारी उज्जवल चौबे को घेरते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।

मुहिम के संयोजक एवं वार्ड पार्षद साईं शंकर ने अंचलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि 5 फरवरी 2022 को नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार द्वारा जारी पत्रांक 325 और 326 के अनुसार, नगर निकायों को निर्देशित किया गया था कि शहरी बेघरों को वास हेतु सरकारी भूमि उपलब्ध कराकर बहु-मंजिला इमारतें बनाई जाएं। तीन वर्ष बीतने के बाद भी नगर परिषद और अंचल प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा सके हैं।

आक्रोशित महिलाओं ने अंचलाधिकारी को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के साथ समन्वय कर जमीन आवंटन की दिशा में तुरंत कार्य नहीं हुआ, तो सभी बेघर लोग एकजुट होकर शहर के सभी सरकारी दफ्तरों में तालाबंदी करेंगे।

इस आंदोलन में माला देवी, रेखा देवी, जूली कुमारी, पूजा देवी, आरती देवी, बबीता देवी, किरण देवी, नगीना देवी, पूनम देवी, शर्मिला कुमारी समेत सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। पुरुषों में आर.के. मंडल, रिंकू कुमार, विशाल कुमार, रवि कुमार, श्याम मंडल, राजेश कुमार, शिव कुमार राउत, गांधी राउत, कुंदन राउत, दीप नारायण राउत, सागर कुमार, संजय दास और राजा कुमार जैसे लोग सक्रिय दिखे।

शहर के इन बेघरों की यह आवाज़ न केवल प्रशासन के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह सवाल भी है कि जब योजनाएं मौजूद हैं, तो लाभार्थियों तक उनका लाभ कब पहुंचेगा?

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