बिहार विधानसभा में हंगामा चरम पर: स्पीकर ने डिप्टी सीएम को लगाई फटकार, विपक्षी विधायक के बयान पर भड़के नंदकिशोर यादव
सदन में गरज उठी लोकतांत्रिक मर्यादा की गूंज, कार्यवाही रही बार-बार बाधित
पटना | संवाददाता
बिहार विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार को फिर एक बार सियासी हंगामे और गरमागरम बहसों का अखाड़ा बन गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव इतना बढ़ गया कि विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव को एक नहीं, बल्कि दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस बार टकराव न केवल सत्ता और विपक्ष के बीच था, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर भी तीखा असंतुलन सामने आया।
डिप्टी सीएम पर भड़के स्पीकर
सदन में उस वक्त असहज स्थिति बन गई जब उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और मंत्री जीवेश मिश्रा एक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बार-बार हस्तक्षेप करने लगे। स्पीकर ने पहले मंत्री जीवेश मिश्रा को शांत रहने को कहा, लेकिन जब डिप्टी सीएम विजय सिन्हा भी जोर-शोर से अपनी बात कहने लगे तो स्पीकर नंदकिशोर यादव ने सख्त लहजे में टोकते हुए कहा—
“आप उपमुख्यमंत्री हैं, पर आप सदन में हंगामा नहीं कर सकते। निर्णय लेना अध्यक्ष का अधिकार है, किसी मंत्री का नहीं।”
स्पीकर की सख्ती के बावजूद सत्ता पक्ष के कई विधायक अपनी सीट पर बैठने को तैयार नहीं थे, जिससे नाराज होकर अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित कर दी।
तेजस्वी के भाषण के दौरान फिर गरमा गया माहौल
सदन में जब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अपनी बात रख रहे थे, उस दौरान भी गहमागहमी चरम पर पहुंच गई। स्पीकर ने तेजस्वी को कहा कि वे अपना वक्तव्य संक्षिप्त करें क्योंकि उनके सुझाव पर ही विपक्ष के अन्य विधायकों को भी बोलने का समय मिला है।
इसी दौरान आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कह दिया—
“किसी के बाप का है क्या सदन?”
इस बयान से सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव इस पर खासे नाराज हुए और भाई वीरेंद्र से माफी मांगने को कहा।
“मर्यादा के खिलाफ है यह व्यवहार” – स्पीकर
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि,
“भाई वीरेंद्र ने जो कहा, वह हमने भी सुना है। मैंने कई बार खुद भी खेद जताया है, अब उन्हें भी ऐसा करना चाहिए।”
तेजस्वी यादव ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि,
“हम 14 करोड़ बिहारियों के वोटर लिस्ट से नाम कटने की गंभीर बात कर रहे हैं, इसे सत्ता पक्ष के लोग व्यक्तिगत न लें।”
लेकिन स्पीकर नंदकिशोर यादव मानने को तैयार नहीं थे और बार-बार भाई वीरेंद्र से माफी की मांग करते रहे।
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