मंटो की ‘बिहाइंड द रीड्स’ ने प्रेमचंद रंगशाला में गूँजाया प्रेम और त्रासदी का स्वर

पटना, 3 अगस्त।
जब सआदत हसन मंटो का साहित्य मंच पर उतरता है, तो महज़ कहानी नहीं, बल्कि पूरा समाज आँखों के सामने खड़ा हो जाता है। शनिवार की शाम प्रेमचंद रंगशाला में यही अनुभव रंगम, पटना की प्रस्तुति बिहाइंड द रीड्स ने दर्शकों को दिया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस नाट्य संध्या में दर्शकों ने प्रेम, ईर्ष्या, विश्वासघात और अपराधबोध से बुनी एक मार्मिक गाथा को महसूस किया।

यह नाट्य प्रस्तुति ‘बिहाइंड द रीड्स’ में मंटो की कहानी के गहरे भावनात्मक तत्वों को उजागर करती है।

नाटक का नाट्यरूपांतरण, परिकल्पना और निर्देशन रास राज ने किया। उद्घाटन मंच पर देश के वरिष्ठ नाट्य निर्देशक संजय उपाध्याय, साहित्यकार-वरिष्ठ पत्रकार ध्रुव कुमार, भाजपा कला प्रकोष्ठ के वरुण कुमार, नाट्य व फिल्म निर्देशक मिथिलेश सिंह और शास्त्रीय संगीत गुरु विशाल कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कहानी का मंचीय रूप
मंटो का अफसाना बिहाइंड द रीड्स सरहद के पास रहने वाली फिजा और उसकी माँ आबिदा की कहानी है, जिनकी जिंदगी गरीबी और देह व्यापार के शिकंजे में कैद है। एक दिन फिजा की जिंदगी में राशिद आता है — पहले हमदर्द, फिर प्रेमी बनकर। लेकिन यह प्रेम अधूरा रह जाता है। राशिद की बहन के रूप में आने वाली शाहिना दरअसल उसकी जुनूनी प्रेमिका है, जो ईर्ष्या में फिजा की हत्या कर देती है। यह त्रासदी यहीं खत्म नहीं होती; अपराधबोध में डूबा राशिद शाहिना को भी खत्म कर देता है। अंत में, फिजा की आत्मा लौटकर कहती है — “मैं तुम्हें फिर मिलूँगी, कब, कहाँ, कैसे… पता नहीं, लेकिन ज़रूर मिलूँगी।”

मंच पर संवेदना और सिहरन
फिजा के रूप में पूजा गुप्ता ने मासूमियत और पीड़ा का अद्भुत संगम पेश किया। रास राज ने राशिद के भावनात्मक द्वंद्व को तीव्रता के साथ जिया, वहीं पूजा भास्कर ने शाहिना के जुनून और मानसिक उथल-पुथल को सटीक रूप दिया। आबिदा के किरदार में रेनू सिन्हा ने अनुभवजन्य अभिनय का परिचय दिया, जबकि सह भूमिकाओं में संजीव कुमार, जय राठोर, हर्ष राज और कमलेश वनवासी ने प्रस्तुति में ऊर्जा भरी।

तकनीकी जादू
विनय कुमार की प्रकाश परिकल्पना और स्वप्निल राज का संगीत, दृश्य और श्रव्य दोनों स्तरों पर दर्शकों को कथा में डुबो ले गया। उदय सागर की वेशभूषा, पिंकू राज का सेट डिजाइन और सुनील जी का सेट निर्माण, मंच को मंटो की कहानी के यथार्थ में बदलते रहे। सह निर्देशन निहाल कुमार दत्ता और मंच संचालन जय राठोर ने प्रस्तुति को संतुलित गति दी।

सहयोग की सराहना
प्रस्तुति संयोजन रश्मि सिंह, प्रस्तुति नियंत्रण कृष्णा किंचित और मनोज राज ने किया। मीडिया प्रभारी मनीष महिवाल, वस्त्र विन्यास निभा व आदर्श कुमार, प्रचार-प्रसार में जुड़े सभी कलाकार और रंगकर्मी, तथा प्रेक्षागृह प्रबंधन संभालने वाले प्रतीक्षा आनंद, युवराज कुमार और अनमोल मेहता — सभी के सामूहिक प्रयास ने शाम को यादगार बना दिया।

रंगम ने अंत में प्रयास रंगमंडल, प्रयास रंग अड्डा, राजेश कुमार, अनुपमा पांडेय, किसलय पटना, राधा फिल्म प्रोडक्शन और मीडिया बंधुओं के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *