अहसास नाट्योत्सव का भावपूर्ण समापन, ‘आप की सरिता’ और ‘त हम कुंआरे रहें?’ ने बांधा समां

पटना, संवाददाता।
राजधानी में अहसास कलाकृति, पटना द्वारा आयोजित दो दिवसीय “अहसास के रंग नाट्योत्सव के संग” का समापन रविवार को भावनाओं और व्यंग्य के रंगों के बीच शानदार तरीके से हुआ। समापन अवसर पर रंगम, पटना की प्रस्तुति सतीश चित्रवंशी लिखित एवं रास राज निर्देशित एकल नाटक ‘आप की सरिता’ और अहसास कलाकृति की ओर से सतीश कुमार मिश्र लिखित व कुमार मानव निर्देशित हास्य-व्यंग्य नाटक ‘त हम कुंआरे रहें?’ का प्रभावशाली मंचन किया गया।

संघर्ष और आत्मसम्मान की कहानी ‘आप की सरिता’
एकल नाटक ‘आप की सरिता’ में एक युवती के संघर्ष, आत्मसम्मान और जिजीविषा की मार्मिक कहानी को मंच पर जीवंत किया गया। इंटर परीक्षा में असफल होने के बाद परिवार और समाज के तानों से जूझती सरिता आत्महत्या जैसे कदम पर विचार करती है, लेकिन अंततः साहस का रास्ता चुनती है।
पारिवारिक विरोध के बावजूद वह आत्मनिर्भर बनती है, नौकरी कर अपनी पढ़ाई जारी रखती है और कठिन परिस्थितियों में भी परीक्षा देकर द्वितीय श्रेणी में सफलता हासिल करती है। अंततः पिता का हृदय परिवर्तन होता है और वह उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर होती है।
सरिता की भूमिका में प्रतीक्षा आनंद ने सशक्त अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। वेशभूषा तनु राय, प्रकाश व्यवस्था शिवम कुमार और मंच परिकल्पना निहाल कुमार दत्ता की रही।

हंसी के साथ सामाजिक कटाक्ष ‘त हम कुंआरे रहें?’
हास्य-व्यंग्य नाटक ‘त हम कुंआरे रहें?’ ने दहेज प्रथा और सामाजिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया। नाटक का केंद्र पात्र ज्ञानगुणसागर, जो शारीरिक व मानसिक रूप से दिव्यांग है, अपने पिता की दहेज लालसा के कारण विवाह से वंचित रह जाता है।
घटनाक्रम में हास्यास्पद मोड़ तब आता है, जब वह अपने भाई के ससुराल में ‘हां’ और ‘ना’ तक सीमित जवाबों के कारण भ्रम की स्थिति पैदा कर देता है, जिससे शोक का माहौल बन जाता है। इसके बाद ठगों के जाल में फंसकर उसकी नकली शादी कर दी जाती है और उसकी संपत्ति ठग ली जाती है।
अंत में उसका संवाद—“पहिले शादी नहीं हुआ था त हम कुंआरे थे, अब शादी हो गया, तबो हम कुंआरे रह गए…”—दर्शकों को हंसाते हुए सोचने पर मजबूर कर देता है।
नाटक में मंतोष कुमार, भुवनेश्वर कुमार, विजय कुमार चौधरी, राजकिशोर पासवान, कुमार मानव, आर्यन कुमार और बलराम कुमार ने सशक्त अभिनय किया।

यादगार रहा समापन
दोनों प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावनात्मक गहराई और हास्य के रंगों से सराबोर कर दिया। प्रभावशाली मंच सज्जा, सटीक प्रकाश और दमदार अभिनय के साथ नाट्योत्सव का समापन यादगार बन गया।

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