जमालपुर

प्राकृतिक सौंदर्य से सुसज्जित आनंद सम्भूति मास्टर यूनिट के प्रांगण में चल रहे विश्व स्तरीय धर्म महासम्मेलन का भव्य आगाज किया गया। इस अवसर पर “बाबा नाम केवलम्” की अष्टाक्षरी मंत्र गूंज के साथ आनंद मार्ग अनुयायियों ने भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी की आराधना में डूबते हुए आध्यात्मिक भाव की अनुभूति की।

महासम्मेलन की शुरुआत सामूहिक साधना, प्रभात संगीत, तथा अद्वितीय कौशिकी और तांडव नृत्य के अभ्यास के साथ हुई। जैसे ही श्रद्धेय पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानन्द अवधूत जी सम्मेलन में पधारे, पूरे पंडाल में “आनंद मार्ग अमर है” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। आचार्य जी ने बाबा आनंदमूर्ति जी के प्रतिकृति पर माल्यार्पण कर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

इस शुभ अवसर पर भक्ति और साधना पर विचार प्रकट करते हुए आचार्य विश्वदेवानन्द जी ने भक्ति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भक्ति ही जीवन का सार है, और जिसने भक्ति के रस का अनुभव कर लिया, उसके लिए जीवन में कुछ भी शेष नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परम पुरुष का साक्षात्कार पाने के लिए भक्ति, कीर्तन, और साधना का मार्ग अनिवार्य है।

आचार्य जी ने बताया कि निष्काम कर्म योग और इष्ट भक्ति का सम्मिलन ही सच्ची भक्ति है, जो परम पुरुष के हृदय को स्पर्श कर उसे भक्त के निकट खींच लाती है। उन्होंने भक्तों से अपील की कि वे अपनी साधना में पूरी शक्ति और श्रद्धा का संचार करें और परम पुरुष के प्रति अपने प्रेम को कर्म योग के माध्यम से पीड़ित मानवता की सेवा में लगाएं।

साधना के साथ-साथ प्रभात संगीत के तीन गीतों का गायन भी हुआ, जिनका हिंदी, अंग्रेजी, और बंगाली अनुवाद कर भाव को सभी साधकों तक पहुंचाया गया। सम्मेलन में नेपाल, बांग्लादेश और अन्य देशों से आए हजारों आनंद मार्गियों ने भी भाग लिया, और इस आयोजन को अपनी उपस्थिति से सफल बनाया।

आचार्य जी के अनुसार, भक्त का सबसे महत्वपूर्ण गुण यही है कि वह हर परिस्थिति में अपने इष्ट को ही अपना आधार बनाता है। उनका कहना था कि भक्ति ही भवसागर को पार करने का सबसे सशक्त माध्यम है।

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