भारत-भूटान संबंध नई ऊँचाइयों पर: ऊर्जा, रेल संपर्क और सीमा विकास पर मोदी-नमग्येल की अहम बैठक

थिम्फू, 11 नवंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को एक नई दिशा दी है। मंगलवार को थिम्फू के चांगलिमिथांग स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान के पूर्व राजा जिग्मे सिंगे वांगचुक के 70वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए कहा कि “भारत और भूटान का रिश्ता सीमाओं से परे, संस्कृति, भावना और विश्वास पर आधारित है।”

उन्होंने कहा कि भारत और भूटान ने कठिन समय में साथ खड़े होकर हर चुनौती का सामना किया है, और अब दोनों देश विकास और समृद्धि की राह पर एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और भूटान के बीच ऊर्जा सहयोग और संपर्क के नए द्वार खुल रहे हैं, जिससे दोनों देशों के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा।

रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे गेलफू और सामत्से

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि जल्द ही भूटान के शहर गेलफू और सामत्से को भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने से भूटान के किसानों और उद्योगों को भारत के विशाल बाजार तक आसान पहुँच मिलेगी। उन्होंने कहा, “कनेक्टिविटी अवसर पैदा करती है, और अवसर समृद्धि लाता है।”

सीमा ढांचे और ‘माइंडफुलनेस सिटी’ को भारत का सहयोग

मोदी ने कहा कि भारत और भूटान सीमा क्षेत्रों में तेज़ी से बुनियादी ढांचे का विकास कर रहे हैं। उन्होंने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक के ‘गेलफू माइंडफुलनेस सिटी’ के सपने को साकार करने में भारत की पूरी सहायता देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत जल्द ही गेलफू के पास एक आव्रजन चौकी (Immigration Checkpoint) भी बनाएगा, ताकि पर्यटकों और निवेशकों के लिए आवागमन सुगम हो सके।

ऊर्जा क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ

ऊर्जा साझेदारी को लेकर मोदी ने कहा कि भारत-भूटान संबंध अब और मज़बूत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच एक नया 1000 मेगावाट का जलविद्युत प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है, जिससे भूटान की जलविद्युत क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि एक लंबे समय से रुकी परियोजना को फिर से शुरू करने पर काम हो रहा है। “हमारा सहयोग केवल जलविद्युत तक सीमित नहीं है, अब सौर ऊर्जा में भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं,” प्रधानमंत्री ने कहा।

पर्यावरण के क्षेत्र में भूटान की मिसाल

मोदी ने भूटान के ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ और ‘एनवायरनमेंट फर्स्ट’ विजन की सराहना की और कहा कि भूटान विश्व का पहला कार्बन निगेटिव देश बनकर मिसाल पेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि आज भूटान प्रति व्यक्ति नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।

संस्कृति और आध्यात्मिकता से जुड़ा संबंध

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और भूटान का रिश्ता केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने वाराणसी में भूटानी मंदिर और अतिथिगृह के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में राजगीर में उद्घाटित रॉयल भूटानी टेंपल भारत-भूटान की साझा सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।

भूटान की लोकतांत्रिक यात्रा की प्रशंसा

मोदी ने भूटान के पूर्व राजा जिग्मे सिंगे वांगचुक की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने 34 वर्ष के शासनकाल में भूटान को आधुनिक विकास और लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भारत-भूटान की मित्रता आज पूरे क्षेत्र के लिए विश्वास और विकास का आदर्श बन चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और भूटान की समृद्धि एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी है। इसी भावना के तहत भारत ने पिछले वर्ष भूटान की पंचवर्षीय योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की थी।

दो दिवसीय भूटान दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच “विश्वास, संस्कृति और विकास की साझेदारी” को और प्रगाढ़ बनाने का प्रयास है।

(TWM News)

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