‘कूली’ में थलाइवा का जलवा बरकरार, मगर लोकेश कनागराज की पकड़ ढीली
सुपरस्टार रजनीकांत की बहुप्रतीक्षित फिल्म कूली सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। लोकेश कनागराज के निर्देशन में बनी इस फिल्म से प्रशंसकों को विक्रम जैसी धमाकेदार वापसी की उम्मीद थी, लेकिन यह फिल्म वैसी ऊँचाई हासिल करने में चूक जाती है। रजनीकांत का करिश्मा और स्टारपावर दर्शकों को सीटों पर टिकाए रखता है, मगर कहानी और पटकथा कहीं-कहीं बेहद ढीली पड़ती है।
कहानी की झलक
फिल्म की कहानी ‘देवा’ (रजनीकांत) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक बंदरगाह पर तस्कर साइमन (नागार्जुन) के साथ काम करता है। लेकिन उसका असली मकसद है अपने दोस्त राजा (सत्यराज) की हत्या की सच्चाई का पर्दाफाश करना। इस बीच राजा की बेटी प्रीति (श्रुति हासन) ‘दया’ (सौबिन शाहिर) के चंगुल में फंस जाती है और घटनाक्रम देवा को अपने बीते हुए अतीत और रहस्यमयी किंगपिन दहा (आमिर खान) तक ले जाता है।
फिल्म की ताकत
- रजनीकांत का स्वैग और करिश्मा अब भी दर्शकों को सीटियों और तालियों पर मजबूर करता है।
- फ्लैशबैक दृश्यों और कुछ एक्शन सीक्वेंसेज़ में थलाइवा की वही पुरानी चमक झलकती है।
- अनिरुद्ध का संगीत फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण है, जो साधारण दृश्यों को भी जोशीला बना देता है।
कमज़ोर कड़ियाँ
- पटकथा में मजबूती की भारी कमी है; पहला हाफ खिंचता है और दूसरा हाफ बेमतलब लंबा लगता है।
- कई जगहों पर घटनाएं असंगत और अनुमानित लगती हैं।
- नागार्जुन का किरदार बेहद कमज़ोर लिखा गया है और आमिर खान का ‘दहा’ देर से आने के बावजूद कोई असर नहीं छोड़ता।
- तकनीकी पक्ष में सिनेमैटोग्राफी और संपादन औसत से नीचे है।
कलाकारों का प्रदर्शन
रजनीकांत फिल्म की रीढ़ हैं, वही हर दृश्य को संभालते हैं। सौबिन शाहिर ऊर्जावान लेकिन कई बार अतिरेक में दिखते हैं। श्रुति हासन का योगदान सीमित है। नागार्जुन और आमिर खान जैसे बड़े नाम पूरी तरह बर्बाद किए गए लगते हैं। उपेंद्र को एक्शन सीक्वेंस में थोड़ा चमकने का मौका मिलता है जबकि रचिता राम अपने छोटे से रोल में प्रभावित करती हैं।
तकनीकी पक्ष
अनिरुद्ध का बैकग्राउंड स्कोर और गाने फिल्म की असली जान हैं। प्रोडक्शन डिज़ाइन भव्य है लेकिन दृश्य संयोजन और कैमरे का काम अपेक्षाओं से कमतर।
निष्कर्ष
कूली एक ऐसे मसाला एंटरटेनर की तरह है जिसमें सारे मसाले मौजूद हैं लेकिन स्वाद सही अनुपात में नहीं मिल पाया। थलाइवा के फैंस के लिए फिल्म कुछ खास पलों के साथ मनोरंजन का जरिया है, लेकिन आम दर्शक के लिए यह एक थकाऊ अनुभव साबित हो सकती है।
👉 रेटिंग: 3.5/5