हरियाणा से पहली बार देश को मिलेगा मुख्य न्यायाधीश : न्यायमूर्ति सूर्यकांत होंगे अगले CJI
नई दिल्ली, संवाददाता।
केंद्र सरकार ने गुरुवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत को देश का अगला मुख्य न्यायाधीश (CJI) नियुक्त करने की घोषणा की है। वे वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस भूषण आर. गवई के सेवानिवृत्त होने के अगले दिन, यानी 24 नवंबर को शपथ लेंगे। जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश होंगे और उनका कार्यकाल करीब 14 महीनों का होगा। वे 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होंगे।
यह पहली बार है जब हरियाणा से कोई न्यायविद भारत के सर्वोच्च न्यायिक पद पर आसीन होगा।
न्यायपालिका के ‘लोकप्रिय चेहरे’ के रूप में पहचान
मुख्य न्यायाधीश गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस सूर्यकांत की अनुशंसा करते हुए कहा था कि “वे इस पद के लिए पूर्ण रूप से योग्य हैं और समाज के हर वर्ग की पीड़ा को समझने की क्षमता रखते हैं।”
साल 1962 में हरियाणा के हिसार जिले के नरनौद क्षेत्र के पेटवार गांव में जन्मे न्यायमूर्ति सूर्यकांत एक साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता संस्कृत के शिक्षक थे और माता गृहिणी। गांव के स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद उन्होंने 1981 में हिसार के सरकारी स्नातकोत्तर कॉलेज से स्नातक और 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से एलएलबी की डिग्री हासिल की।
सेवा के दौरान भी उन्होंने शिक्षा जारी रखी और 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एलएलएम में प्रथम श्रेणी प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके साथी बताते हैं कि वे हमेशा कहते हैं — “सीखना कोई मंज़िल नहीं, बल्कि एक निरंतर यात्रा है।”
एडवोकेट जनरल से सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा
जस्टिस सूर्यकांत ने 1984 में हिसार ज़िला न्यायालय से वकालत की शुरुआत की और अगले वर्ष चंडीगढ़ स्थानांतरित होकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू की।
संवैधानिक, सिविल और सेवा मामलों के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने कई विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों का प्रतिनिधित्व किया।
साल 2000 में मात्र 38 वर्ष की आयु में वे हरियाणा के एडवोकेट जनरल बने — राज्य के इतिहास में इस पद पर आसीन होने वाले सबसे युवा व्यक्ति। अगले वर्ष उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला।
जनवरी 2004 में उन्हें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। प्रारंभ में उन्होंने पारिवारिक दायित्वों के कारण इस पद को स्वीकारने में संकोच किया, लेकिन तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ए.बी. साहारिया के आग्रह पर उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली।
उनके सहयोगियों के अनुसार, “वे न्यायपालिका को अपने जीवन का नैतिक ऋण मानते थे, जिसे वे लौटाना चाहते थे।”
महत्वपूर्ण फैसले और जनहित की दृष्टि
उच्च न्यायालय में रहते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए।
उन्होंने जेल बंदियों के “वैवाहिक मुलाक़ात के अधिकार” को मानव गरिमा का हिस्सा माना, 2017 में डेरा सच्चा सौदा हिंसा के बाद सिरसा मुख्यालय की सफाई का आदेश दिया और पंजाब-हरियाणा में नशे के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की निगरानी की।
अक्टूबर 2018 में वे हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने, जहां उनके प्रशासनिक कौशल और पारदर्शिता की सराहना की गई। वे हमेशा कहते थे — “जिला न्यायपालिका ही न्याय व्यवस्था का असली आईना है।”
सुप्रीम कोर्ट में योगदान और प्रमुख मामलों में भूमिका
मई 2019 में जस्टिस सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया। अब तक उन्होंने 300 से अधिक फैसले लिखे हैं, जिनमें संविधान, आपराधिक कानून और प्रशासनिक मामलों से जुड़े कई अहम निर्णय शामिल हैं।
वे अनुच्छेद 370 हटाने, नागरिकता अधिनियम की धारा 6A, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने जैसे कई चर्चित मामलों में शामिल रहे।
संवेदनशीलता और सुधारवादी दृष्टिकोण के प्रतीक
न्यायमूर्ति सूर्यकांत अपनी विनम्रता, सहानुभूति और संस्थागत सुधारों के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और हाल ही में वीर परिवार सहायता योजना 2025 की शुरुआत की, जिसके तहत सैनिकों और उनके परिवारों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जा रही है।
नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें
मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका ध्यान जिला न्यायालयों के ढांचे को सुदृढ़ करने, न्यायिक डिजिटलीकरण को गति देने और न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
साहित्य, प्रकृति और कविता के प्रेमी जस्टिस सूर्यकांत को एक ऐसे न्यायाधीश के रूप में जाना जाता है, जो कानून में मानवीय संवेदना को जोड़ते हैं।
अब पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वे अपने 14 माह के कार्यकाल में न्यायपालिका को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।