जन सुराज को बिहार चुनाव में करारी शिकस्त, पार्टी करेगी आत्ममंथन; पवन के. वर्मा बोले—“जनता का भरोसा नहीं जीत पाए”

पटना।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी कोई खास छाप छोड़ने में नाकाम रही। मतगणना के रुझानों में पार्टी कहीं भी बढ़त हासिल नहीं कर पाई, जिसके बाद प्रवक्ता पवन के. वर्मा ने इसे “गंभीर समीक्षा” का समय बताया। वर्मा ने कहा कि पार्टी पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ चुनावी मैदान में उतरी थी, लेकिन जनता का विश्वास नहीं जीत सकी।

शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में वर्मा ने स्वीकार किया कि दो वर्षों की पदयात्रा, संगठन विस्तार और जमीनी अभियान के बावजूद चुनावी समर्थन नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा, “हमने पूरी ईमानदारी से काम किया, बदलाव की इच्छा के साथ चुनाव लड़े। लेकिन यदि जनता ने हमें स्वीकार नहीं किया है, तो हमें आत्मविश्लेषण करना होगा।”

NDA की प्रचंड बढ़त, महागठबंधन हाशिये पर

जहां जन सुराज चुनाव में लड़खड़ा गई, वहीं NDA ने भारी बढ़त के साथ राज्य की राजनीति पर दबदबा बना लिया। नवीनतम रुझानों के अनुसार, NDA 208 सीटों पर आगे रहा—जेडीयू 85, बीजेपी 95 और सहयोगी दल LJP (RV) 19 तथा HAM(S) 5 सीटों पर मजबूती से आगे रहे।
महागठबंधन 32 सीटों तक सिमटता दिखा, जिसमें RJD 24, कांग्रेस 5 और CPI(ML) 2 सीटों पर आगे रही।

इसके विपरीत जन सुराज किसी भी सीट पर असरदार उपस्थिति दर्ज नहीं करा सकी, जबकि प्रशांत किशोर की यात्रा और संवाद कार्यक्रमों ने पिछले वर्षों में काफी चर्चा बटोरी थी।

“मुख्यधारा की राजनीति को मुद्दों पर सोचने को मजबूर किया”

पवन के. वर्मा ने हालांकि इस बात पर संतोष जताया कि जन सुराज द्वारा उठाए गए रोजगार, शिक्षा, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे अब सभी दलों के एजेंडे में जगह पा चुके हैं।
उन्होंने कहा, “अगर जनता का जनादेश नहीं मिला, तो भी इस बात की खुशी है कि बिहार के असली मुद्दों को हमने मुख्यधारा की राजनीति में केंद्र में ला दिया है।”

नीतीश कुमार को ‘जनादेश’, वर्मा ने दी शुभकामनाएं

NDA की बढ़त पर प्रतिक्रिया देते हुए वर्मा ने कहा कि चुनाव अक्सर अनुमान से अलग दिशा ले लेते हैं।
उन्होंने कहा, “नीतीश जी को बिहार आज भी स्वीकारता है। मैंने उनके साथ काम किया है, और उनकी जीत पर उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। उम्मीद है वे फिर मुख्यमंत्री बनें।”

जन सुराज में निराशा, लेकिन संघर्ष जारी

हार की स्वीकारोक्ति के बावजूद वर्मा ने यह साफ किया कि प्रशांत किशोर बिहार छोड़ने वाले नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “यह उनका व्यक्तिगत निर्णय होगा, लेकिन सच्चाई यह है कि वे बिहार से अलग नहीं हो सकते, और बिहार भी उनसे अलग नहीं हो सकता।”

वर्मा ने संकेत दिया कि पूरी मतगणना के बाद प्रशांत किशोर पार्टी की आगे की रणनीति पर बयान देंगे।
“परिणाम निराशाजनक हैं, इसमें दो राय नहीं। अब हम अपनी कमियों की समीक्षा कर आगे की राह तय करेंगे,” उन्होंने कहा।

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