झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का और पत्नी मेनन को सात साल की सजा, ज़मीन घोटाले में सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला
रांची,
झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का और उनकी पत्नी मेनन एक्का को शनिवार को रांची स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 15 साल पुराने ज़मीन घोटाले मामले में सात-सात साल की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
इसी मामले में तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता (एलआरडीसी) कार्तिक प्रभात को चार साल की सख्त कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। अन्य आरोपितों को भी दोषी ठहराते हुए अदालत ने सजा सुनाई। जुर्माना न चुकाने पर एक-एक साल अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
फर्जी पते से खरीदी गई आदिवासी ज़मीन
अभियोजन पक्ष के अनुसार, एनोस एक्का ने मंत्री पद पर रहते हुए अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर फर्जी पते और दस्तावेज़ों के ज़रिये बड़े पैमाने पर आदिवासी ज़मीन की ख़रीद-फरोख्त कराई। यह सीएनटी (छोटानागपुर काश्तकारी) एक्ट का खुला उल्लंघन था।
जांच में खुलासा हुआ कि मार्च 2006 से मई 2008 के बीच एक्का दंपती ने सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से कई सौदों को अंजाम दिया। इनमें मेनन एक्का के नाम पर हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़, नेवरी में 4 एकड़ और चुटिया के सिरमटोली मौजा में 9 डिसमिल ज़मीन खरीदी गई थी।
सीबीआई ने सभी आरोप साबित किए
सीबीआई ने इस मामले में गहन जांच कर अदालत में ठोस साक्ष्य पेश किए। शुक्रवार को अदालत ने सभी आरोपितों को दोषी करार दिया था और शनिवार को सजा का ऐलान हुआ। सभी दोषी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए।
पूर्व मंत्री की चौथी सजा
गौरतलब है कि एनोस एक्का पहले भी कई गंभीर मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं। उन्हें पहले ही परा-शिक्षक हत्या कांड, मनी लॉन्ड्रिंग और disproportionate assets (असमानुपातिक संपत्ति) मामलों में सजा मिल चुकी है। ज़मीन घोटाला केस में आया ताज़ा फैसला उनके खिलाफ चौथा बड़ा आपराधिक दोष सिद्ध करता है।