MSP की गारंटी सहित कई मांगें उठाईं

किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज़ करने का ऐलान किया है। शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने 26 नवंबर से ‘अनशन’ शुरू करने की घोषणा की। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार उनकी मांगों को लेकर कोई कदम नहीं उठा रही है।

डल्लेवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “26 नवंबर से हम खनौरी बॉर्डर पर अनशन शुरू करेंगे। केंद्र सरकार ने 18 फरवरी के बाद से हमारी मांगों पर कोई बातचीत नहीं की है।”

किसानों की प्रमुख मांगें:

1. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी।

2. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों का क्रियान्वयन।

3. किसानों और कृषि मजदूरों के लिए पेंशन योजना।

4. बिजली दरों में बढ़ोतरी रोकना।

5. पुलिस मामलों की वापसी।

6. 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय।

7. भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की बहाली।

8. 2020-21 के आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा।

 

दिल्ली चलो मार्च का नेतृत्व:
संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। यह मार्च किसानों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया।

बॉर्डर पर डटे किसान:
प्रदर्शनकारी किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं। उस समय सुरक्षा बलों ने उनके मार्च को रोक दिया था।

किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अब वे अपने अधिकारों के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे।

 

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