कोलकाता में मेसी कार्यक्रम बना अव्यवस्था का अखाड़ा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मांगी माफी, आयोजक गिरफ्तार, टिकट राशि लौटाने का ऐलान
कोलकाता: सॉल्ट लेक स्थित युवा भारती स्टेडियम में आयोजित फुटबॉल महोत्सव उस समय हंगामे में बदल गया, जब हजारों दर्शक अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी को देखने के बावजूद उनकी एक झलक तक नहीं देख सके। भारी टिकट राशि चुकाने के बाद भी निराश लौटे प्रशंसकों का गुस्सा बेकाबू हो गया और स्टेडियम में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।
घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह घटना खेल प्रेमियों के साथ अन्याय है और इसकी गहन जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति के गठन की घोषणा की है, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति असीम कुमार रॉय करेंगे। समिति में राज्य के मुख्य सचिव और गृह एवं पर्वतीय मामलों के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी शामिल किया गया है। समिति को पूरे घटनाक्रम की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के सुझाव देने का निर्देश दिया गया है।
इस बीच, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) जावेद शमीम ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य आयोजक शतद्रु दत्ता को अव्यवस्था और कुप्रबंधन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दर्शकों से वसूली गई टिकट राशि वापस की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, लियोनेल मेसी सुबह करीब 11:30 बजे स्टेडियम पहुंचे थे। कार से उतरते ही वे मंत्रियों, अधिकारियों और आमंत्रित अतिथियों से घिर गए, जिससे दर्शक दीर्घाओं में बैठे लोग उन्हें देख ही नहीं पाए। सुरक्षा घेरा होने के बावजूद मेसी लगभग 20 मिनट तक दर्शकों की नजरों से ओझल रहे। विशाल स्क्रीन पर भी उनकी स्पष्ट तस्वीर नहीं दिख सकी, जिससे दर्शकों में नाराजगी फैल गई और “वी वांट मेसी” के नारे गूंजने लगे।
पूर्व फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ परिचय कार्यक्रम के दौरान भी हालात नहीं सुधरे। मंच और मैदान के आसपास नेताओं और आयोजकों की भीड़ के कारण अव्यवस्था बनी रही। बार-बार शांति बनाए रखने की अपीलें बेअसर रहीं। हालात काबू से बाहर होते देख कथित तौर पर लाठीचार्ज का सहारा लिया गया, जिससे आक्रोश और भड़क उठा।
करीब 11:52 बजे मेसी को मैदान से बाहर ले जाया गया। उस समय तक मुख्यमंत्री, अभिनेता शाहरुख खान और पूर्व क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे थे। मेसी के जाने के बाद दर्शकों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया। गैलरी में लगे होर्डिंग्स तोड़ दिए गए और कुर्सियां मैदान में फेंकी गईं। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि उस समय गैलरी में पुलिस की मौजूदगी न के बराबर थी।
हजारों रुपये खर्च कर आए फुटबॉल प्रेमियों की उम्मीदें टूट गईं। जिस आयोजन को खेल उत्सव बनना था, वह कुप्रबंधन, आक्रोश और अव्यवस्था की मिसाल बन गया। अब राज्य सरकार की जांच समिति और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।