मां मनसा देवी मंदिर में मची भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की मौत, 25 से अधिक घायल
श्रावण के पहले रविवार पर उमड़ी भीड़, संकरी सीढ़ियों पर मची अफरातफरी; सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
हरिद्वार, 27 जुलाई।
श्रावण मास के पहले रविवार को हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर में हुए एक दर्दनाक हादसे में 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हो गए। यह हादसा मंदिर की ओर जाने वाली मुख्य सीढ़ियों पर उस वक्त हुआ जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर पहुंच रहे थे और अचानक अफरातफरी मच गई।
गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया, “मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ के चलते भगदड़ मची, जिसमें छह लोगों की जान चली गई है। मैं मौके के लिए रवाना हो गया हूं और विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार है।”
घटना के तुरंत बाद पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। गंभीर रूप से घायल पांच श्रद्धालुओं को बेहतर इलाज के लिए ऋषिकेश स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है। प्रशासन मृतकों की पहचान में जुटा हुआ है।
“करंट लगा” अफवाह से मची दहशत?
घटना के प्रत्यक्षदर्शी बंटी ने बताया कि मंदिर के समीप एक खंभे में करंट महसूस होने की अफवाह फैली, जिससे लोग घबरा गए और भगदड़ मच गई। हालांकि हरिद्वार पुलिस ने प्राथमिक जांच के आधार पर बिजली करंट की आशंका को खारिज करते हुए कहा कि घटना का कारण अत्यधिक भीड़ और असमंजस रहा।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने जताया दुख
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में भगदड़ की दुखद खबर अत्यंत पीड़ादायक है। मैं जिला प्रशासन के लगातार संपर्क में हूं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहा हूं। मां भगवती से सभी श्रद्धालुओं की कुशलता की प्रार्थना करता हूं।”
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, “हरिद्वार स्थित मां मनसा देवी मंदिर के रास्ते में भगदड़ की घटना से अत्यंत दुखी हूं। शोकसंतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
श्रावण जैसे विशेष अवसर पर मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर यह हादसा एक बार फिर प्रशासन की तैयारियों और भीड़ प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मंदिर मार्ग की संकरी सीढ़ियां और सीमित स्थान के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को नियंत्रित न कर पाना इस त्रासदी की मुख्य वजह माना जा रहा है।
जांच के आदेश, सुरक्षा नीति की समीक्षा तय
प्रशासन ने हादसे के बाद मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों की सुरक्षा समीक्षा शुरू कर दी है। संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार द्वारा एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर इस पूरे मामले की तह तक जाकर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और भविष्य के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइंस बनाई जाएंगी।
(TWM न्यूज़ के लिए रिपोर्टिंग डेस्क से)