मुंगेर कांग्रेस में उपेक्षा का आलम: तिलक मैदान में पहली बार नहीं मनाई गई बिहार केसरी श्रीकृष्ण बाबू की जयंती

मुंगेर। बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह उर्फ “बिहार केसरी” की 138वीं जयंती मंगलवार को पूरे राज्य में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई, परंतु मुंगेर कांग्रेस मुख्यालय तिलक मैदान इस बार सूना रहा। परंपरा के विपरीत, जिले में कांग्रेस की ओर से श्रीकृष्ण बाबू की जयंती का आयोजन नहीं किया गया, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी गई।

बताया जाता है कि मुंगेर जिला कांग्रेस द्वारा हर वर्ष 21 अक्टूबर को विशेष कार्यक्रम आयोजित कर बिहार केसरी को श्रद्धांजलि दी जाती थी, किंतु इस वर्ष जिला अध्यक्ष अशोक पासवान की निष्क्रियता के चलते कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह पहली बार हुआ है जब मुंगेर में कांग्रेस कार्यालय के दरवाजे बंद रहे और कार्यकर्ताओं को स्वयं अपने नेता की जयंती पर श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं मिला।

कार्यकर्ताओं ने जिला अध्यक्ष अशोक पासवान पर संगठन की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वर्तमान अध्यक्ष के कार्यकाल में न तो कोई संगठनात्मक बैठक बुलाई जा रही है, न ही प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों पर अमल हो रहा है। वहीं, जमालपुर विधायक डॉ. अजय कुमार सिंह के टिकट कटने से पहले से ही कार्यकर्ताओं में असंतोष था, जिस पर इस जयंती की अनदेखी ने आग में घी का काम किया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने कहा कि श्रीकृष्ण बाबू न केवल बिहार के गौरव थे, बल्कि कांग्रेस की वैचारिक नींव के प्रतीक भी हैं। उनकी जयंती का न मनाया जाना पार्टी के इतिहास और परंपरा दोनों के प्रति असम्मान है। कई स्थानीय नेताओं ने मांग की है कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को इस घटना का संज्ञान लेकर जिला संगठन की कार्यप्रणाली पर कार्रवाई करनी चाहिए।

मुंगेर के राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि आंतरिक कलह और गुटबाजी के कारण कांग्रेस का जिला संगठन धीरे-धीरे निष्क्रिय होता जा रहा है। वहीं, आम कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि संगठन में सुधार नहीं हुआ तो वे आगामी समय में खुला विरोध दर्ज करेंगे।

“श्री बाबू बिहार की आत्मा हैं, उनकी उपेक्षा कांग्रेस की आत्मा को कमजोर करती है।” — स्थानीय कार्यकर्ता

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