न्यायमूर्ति सुर्या कांत बने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश
नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय को सोमवार को नया नेतृत्व मिला, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न्यायमूर्ति सुर्या कांत को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ दिलाई। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस औपचारिक समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय मंत्री और शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों की उपस्थिति रही।
न्यायमूर्ति सुर्या कांत की यात्रा एक साधारण किसान परिवार से शुरू होकर भारत की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुँची है। हरियाणा के हिसार जिले के पेतवार गाँव में जन्मे कांत ने स्थानीय स्कूलों में शिक्षा प्राप्त की और 1984 में महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की डिग्री हासिल की। उसी वर्ष उन्होंने वकालत शुरू की, पहले हिसार में और फिर चंडीगढ़ में, जहाँ उन्होंने संवैधानिक, सेवा और नागरिक मामलों में अपनी मजबूत पहचान बनाई। बाद में, न्यायाधीश रहते हुए भी उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एलएलएम में प्रथम श्रेणी के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया।
कानूनी क्षेत्र में उनकी प्रगति उल्लेखनीय रही है—2000 में वे मात्र 38 वर्ष की उम्र में हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता नियुक्त हुए। इसके बाद 2001 में वरिष्ठ अधिवक्ता और 2004 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश बनाए गए। अक्टूबर 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया, और मई 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट पहुँचे।
सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान न्यायमूर्ति सुर्या कांत कई महत्वपूर्ण संविधान पीठों का हिस्सा रहे हैं। वे उन ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहे, जिनमें अनुच्छेद 370 की समाप्ति, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन, बिहार में मतदाता सूची संशोधन, तथा पेगासस जासूसी मामले से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इन फैसलों ने भारत के संवैधानिक ढाँचे और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर दूरगामी प्रभाव डाले हैं।
न्यायमूर्ति सुर्या कांत के कार्यकाल से न्यायपालिका में पारदर्शिता, संवैधानिक मूल्यों और संस्थागत मजबूती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। उनका नेतृत्व आने वाले वर्षों में भारतीय न्यायपालिका की दिशा और दृष्टि को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगा।