‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बहस की मांग को लेकर हंगामा, लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित
नई दिल्ली ब्यूरो | TWM न्यूज़
लोकसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी विपक्षी दलों के हंगामे की भेंट चढ़ गया। मंगलवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए, जोरदार नारेबाजी की और हाथों में तख्तियां लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर तत्काल बहस की मांग करने लगे।
विपक्ष के इस प्रदर्शन के कारण अध्यक्ष ओम बिरला को कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इससे पहले सोमवार को भी संसद में इसी मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ था, जिससे दिनभर की कार्यवाही प्रभावित रही।
कृषि मंत्री की अपील, विपक्ष नहीं माना
हंगामे के बीच कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी सांसदों से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “आज का दिन किसानों के लिए है। कृपया सदन को चलने दें ताकि हम किसानों, गरीबों और ग्रामीण भारत से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकें।” लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी मांग पर अड़े रहे।
लोकसभा अध्यक्ष ने लगाई फटकार
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में नारेबाजी और पोस्टर लहराने पर आपत्ति जताते हुए कहा, “आप नहीं चाहते कि सदन चले। आप किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहते। मैं सदन में इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं कर सकता।” उन्होंने कई बार सांसदों को चेताया, लेकिन जब स्थिति नहीं सुधरी तो कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
गौरतलब है कि भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में 7 मई से तीन दिवसीय सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। जवाबी कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और सामरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
विपक्ष की मांग है कि सरकार इस सैन्य कार्रवाई की योजना, विस्तार और असर पर संसद में विस्तृत चर्चा करे। उनका कहना है कि संसद को देश की सुरक्षा से जुड़े इतने महत्वपूर्ण ऑपरेशन की जानकारी दी जानी चाहिए।
हंगामे के आसार आगे भी
जिस तरह से विपक्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर सरकार को घेरने के मूड में है, यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाना मुश्किल होगा। सरकार एक ओर जहां किसानों और विकास से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है, वहीं विपक्ष इस सैन्य कार्रवाई पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग पर अड़ा है।
मानसून सत्र में अब तक बहस से ज्यादा शोरगुल देखने को मिला है। क्या सरकार विपक्ष की मांगों को सुनते हुए कोई औपचारिक बयान देगी या यह गतिरोध और गहराएगा – यह देखने वाली बात होगी।