राहुल-तेजस्वी की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस से बढ़ा सियासी असमंजस
महागठबंधन में ‘चेहरे’ की तलाश या सामूहिक नेतृत्व का संकेत?
पूर्णिया, संवाददाता।
बिहार की राजनीति में महागठबंधन की ओर से नेतृत्व को लेकर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं। पूर्णिया में आयोजित ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जब एक मंच पर आए तो सियासी संदेश साफ था कि विपक्ष एकजुट है। दोनों नेताओं ने ईवीएम, मतदाता सूची में नाम काटने, जातीय जनगणना और महंगाई जैसे मुद्दों पर केंद्र व एनडीए सरकार को घेरा।
राहुल गांधी ने कहा, “यह यात्रा लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई है। हर वह व्यक्ति जो अधिकारों की बात करता है, हम उसके साथ खड़े हैं।” वहीं तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि “बिहार बदलाव चाहता है और राहुल जी इस संघर्ष में सबसे आगे हैं। हम सब एकजुट होकर लड़ रहे हैं।”
सीएम चेहरे को लेकर टला सवाल
हालांकि इस साझा मंच पर सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि 2025 के चुनाव में महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा? जब पत्रकारों ने राहुल गांधी से पूछा कि क्या तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम उम्मीदवार माना जाएगा, तो उन्होंने सीधे जवाब से परहेज किया। उन्होंने कहा कि “सारी पार्टियां मिलकर काम कर रही हैं, साझेदारी बेहद मजबूत है और परिणाम शानदार होगा। सबसे बड़ी चुनौती वोट चोरी को रोकना है।”
उनके इस जवाब को न तो साफ ‘हां’ माना जा सकता है और न ही ‘ना’। यही कारण है कि सियासी हलकों में कयास तेज हो गए कि कांग्रेस अभी भी ‘चेहरे’ की बजाय ‘सामूहिक नेतृत्व’ की रणनीति पर काम कर रही है।
भाजपा का तंज, महागठबंधन में बेचैनी
राहुल गांधी के बयान पर भाजपा ने चुटकी लेते हुए कहा, “तेजस्वी को तो राहुल पसंद हैं, लेकिन राहुल को तेजस्वी कतई पसंद नहीं हैं। कांग्रेस का खेला अंदर ही अंदर चल रहा है।”
वहीं आरजेडी खेमे में कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर समर्थक सवाल उठा रहे हैं कि क्या कांग्रेस तेजस्वी यादव को पीछे करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस चाहती है कि आरजेडी पूरी तरह से हावी न हो। यही कारण है कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व की लाइन पर जोर दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, संभव है कि चुनाव से पहले किसी एक नाम की घोषणा न की जाए और परिणाम आने के बाद सभी दलों की सहमति से नेता चुना जाए।