राजीव गांधी हत्याकांड की परतें खोलता ‘द हंट’, बिना शोर-शराबे के एक सधी हुई प्रस्तुति
राजनीति से दूर रहकर नागेश कुकुनूर ने दिखाया सच्चाई का आईना, ‘द हंट’ बनी एक जरूरी वेब सीरीज़
मनोरंजन डेस्क, TWM न्यूज़ | पटना, 5 जुलाई 2025:
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या भारतीय लोकतंत्र की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है। इस संवेदनशील और जटिल मामले को पर्दे पर लाना आसान नहीं, और उसे बिना किसी राजनीतिक एजेंडे के दिखाना उससे भी कठिन। लेकिन निर्देशक नागेश कुकुनूर ने अपनी नई वेब सीरीज़ ‘द हंट – द राजीव गांधी असैसिनेशन केस’ के जरिए यह काम न सिर्फ बखूबी किया है, बल्कि एक नई मिसाल भी पेश की है।
अनिरुद्ध मित्रा की किताब ‘नाइंटी डेज’ पर आधारित इस सीरीज़ को SonyLIV पर स्ट्रीम किया गया है। सात एपिसोड की यह थ्रिलर दर्शकों को स्क्रीन से बांधकर रखती है। कहानी राजीव गांधी की हत्या से शुरू होती है और फिर घटनाक्रमों की गहराई में जाकर जांच की परतें खोलती है।
राजनीति से परे, सच्चाई के करीब
इस सीरीज़ की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह किसी पार्टी या विचारधारा के पक्ष या विपक्ष में नहीं जाती। न ही यह किसी सस्ती सनसनी या भावनात्मक उबाल का सहारा लेती है। शो की पृष्ठभूमि जितनी गंभीर है, प्रस्तुति उतनी ही संतुलित। असल फुटेज और तमिल संवादों के सबटाइटल इसकी विश्वसनीयता को बढ़ाते हैं और दर्शक को 90 के दशक के उस वक्त में ले जाते हैं जब ये जांच एजेंसियों के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण दौर था।
सधी हुई अदाकारी, सटीक निर्देशन
मुख्य भूमिका में अमित सियाल ने SIT प्रमुख डी.आर. कार्तिकेयन के किरदार में गजब की आत्मनियंत्रित अभिनय क्षमता दिखाई है। बिना ऊंची आवाज़ या संवादबाज़ी के भी वो असर छोड़ते हैं। साहिल वैद्ध, भगवती पेरुमल, दानिश इकबाल, गिरीश शर्मा और विद्युत गर्ग जैसे कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को पूरी सच्चाई और सहजता से निभाया है।
निर्देशक नागेश कुकुनूर का दृष्टिकोण यहां भी साफ झलकता है—न कोई हीरोइज़्म, न कोई सस्पेंस के लिए ज़बरदस्ती की कलाबाजी। सब कुछ एक डॉक्यू-ड्रामा के अंदाज़ में, लेकिन पूरी पकड़ के साथ। उन्होंने हर किरदार को अपना स्थान दिया और कहानी को ही असली नायक बनाया।
क्या देखनी चाहिए ये सीरीज़?
अगर आप भारतीय राजनीति और इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं, और राजीव गांधी हत्याकांड को केवल अखबारों या टीवी की हेडलाइनों से जानते हैं, तो यह सीरीज़ आपके लिए जरूरी है। यह जानकारी भी देती है और सोचने को भी मजबूर करती है।
रेटिंग: 3.5/5