पटना

बिहार में शराबबंदी और जहरीली शराब कांड को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखे हमले करते हुए उनकी शराबबंदी नीति को विफल बताया है। तेजस्वी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि वह महात्मा गांधी बनने का ढोंग कर रहे हैं, जबकि उनके शासनकाल में शराबबंदी के नाम पर हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में लिखा, “बिहार के मुख्यमंत्री ने एक ओर शराब की खपत बढ़ाने के हर संभव उपाय किए, वहीं दूसरी ओर अब अवैध शराब की बिक्री रोकने के नाम पर जनता को गुमराह कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने अपने शुरुआती 10 वर्षों में राज्य भर में शराब की दुकानों की संख्या दोगुनी कर दी थी। 2005 से 2015 तक उनके कार्यकाल में शराब की दुकानों की संख्या 3,000 से बढ़कर 6,000 हो गई थी। यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री की नीति ने कैसे राज्य में शराब के व्यापार को बढ़ावा दिया।”

शराबबंदी के बाद की स्थिति पर तेजस्वी ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद 15.5% पुरुष शराब का सेवन करते हैं, जो महाराष्ट्र जैसे राज्यों से भी अधिक है, जहां शराबबंदी लागू नहीं है। उन्होंने इसे नीतीश कुमार की असफल शराबबंदी नीति का प्रमाण बताया।

इसके साथ ही तेजस्वी ने शराब से जुड़े मामलों में हो रही गिरफ्तारी और छापेमारी के आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार, बिहार में रोज़ाना औसतन 400 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी शराबबंदी कानून के तहत होती है और हर दिन 6,600 से अधिक जगहों पर छापेमारी की जाती है। बावजूद इसके, शराब का अवैध व्यापार बंद नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज़ब्त की गई शराब को जेडीयू नेताओं, शराब माफियाओं और पुलिस की मिलीभगत से फिर से बाजार में बेचा जा रहा है।

तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि शराबबंदी कानून का शिकार सबसे ज्यादा दलित और वंचित जातियों के लोग हो रहे हैं। शराबबंदी के उल्लंघन के 8.43 लाख मामलों में से 95% गिरफ्तारियां इन्हीं समुदायों से हुई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर शराबबंदी के नाम पर सबसे ज्यादा शोषण वंचित जातियों का ही क्यों हो रहा है?

उन्होंने इस पूरे मुद्दे को नीतीश कुमार के शासनकाल का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार करार दिया। तेजस्वी का कहना है कि शराबबंदी के नाम पर राज्य में 30,000 करोड़ रुपये की समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था चल रही है, जिसका सीधा लाभ जेडीयू पार्टी और उसके नेताओं को मिल रहा है।

तेजस्वी यादव के इस हमले ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर शराबबंदी को लेकर बहस को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी ने यह साफ संकेत दिया है कि आगामी चुनावों में यह मुद्दा प्रमुख रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *