उत्तर विजय की हीरक जयंती : शौर्य, स्मृति और संकल्प का पर्व
लेखक : अमर शर्मा
फिरोज़पुर/अमृतसर। 1965 के भारत-पाक युद्ध में असल उत्तर की ऐतिहासिक जीत को भारतीय सेना ने मंगलवार को हीरक जयंती समारोह के रूप में मनाया। इस अवसर पर वीरता, बलिदान और देशभक्ति की अमर गाथाओं को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।
मुख्य अतिथि पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने इस अवसर पर कहा कि 1965 की जंग सिर्फ़ सीमा पर हुई लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह पूरे राष्ट्र के आत्मविश्वास, साहस और एकजुटता की पहचान थी। उन्होंने कहा कि ‘आर्काइव-कम-म्यूजियम’ और ‘हमीद गैलरी’ की स्थापना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत बनेगी।
वीरता की प्रतिमूर्ति : अब्दुल हमीद
कार्यक्रम के दौरान कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद, परमवीर चक्र (मरणोपरांत) को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अब्दुल हमीद ने असल उत्तर की धरती पर दुश्मन के अत्याधुनिक टैंकों को ध्वस्त कर इतिहास रच दिया था। उनकी अद्वितीय बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान आज भी नई पीढ़ी को साहस और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देता है।
सेना और समाज का अटूट रिश्ता
इस अवसर पर पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ़ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने 72 फुट ऊँचे राष्ट्रीय ध्वज को शहीद स्मारक पर फहराया। बड़ी संख्या में युद्धवीर, वीर नारियाँ, सैन्य अधिकारी, छात्र और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। समारोह में वीर नारियों और युद्ध वीरों को सम्मानित किया गया।
राज्यपाल कटारिया ने कहा कि अमृत काल की ओर बढ़ते भारत में सेना न केवल सुरक्षा की गारंटी है, बल्कि राष्ट्रीय एकता, अनुशासन और युवाओं को प्रेरित करने वाली शक्ति भी है। उन्होंने सेना और INTACH द्वारा सीमावर्ती पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल की सराहना की और कहा कि यह सैनिक और नागरिकों के बीच रिश्तों को और मज़बूत बनाएगी।
स्मृति और संकल्प का संगम
‘हमीद गैलरी’ को जनता के लिए समर्पित किया गया, जिसमें 1965 के युद्ध से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज़, वस्तुएँ और शौर्य कथाएँ संजोई गई हैं। ‘आर्काइव-कम-म्यूजियम’ भविष्य की पीढ़ियों को यह बताने का प्रयास करेगा कि राष्ट्र की रक्षा के लिए सैनिकों ने किन त्यागों और बलिदानों का परिचय दिया।