चार करोड़ बिहारी बाहर, तेजस्वी ने उठाए सात सवाल — “क्या मतदाता बनना अब दस्तावेज़ों की कड़ी परीक्षा है?”
पटना, ब्यूरो रिपोर्ट।
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात की। बैठक के बाद तेजस्वी यादव ने निर्वाचन आयोग से सात अहम सवाल पूछते हुए कहा कि आयोग की प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती देती है और गरीब मतदाताओं के लिए बाधा बनती जा रही है।
“सिर्फ 11 दस्तावेज़ क्यों?” तेजस्वी का आयोग से सीधा सवाल
तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि क्या भारतीय निर्वाचन आयोग को यह अधिकार है कि वह केवल 11 निर्धारित दस्तावेज़ों को ही मान्य माने और बाकी को खारिज कर दे? उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 326 केवल वयस्क मताधिकार की बात करता है, दस्तावेज़ों की सूची नहीं। “अगर Representation of the People Act में कहीं यह नहीं लिखा कि केवल इन्हीं दस्तावेज़ों को मान्यता दी जाएगी, तो फिर यह सूची किस आधार पर बनी?” तेजस्वी ने पूछा।
आधार को क्यों नकारा जा रहा है?
तेजस्वी ने यह भी सवाल किया कि जब आधार कार्ड बनवाने के लिए सरकार खुद नागरिक की आँखों की पुतली, फिंगरप्रिंट और निवास संबंधी प्रमाण मांगती है, तो फिर वही सरकार मतदाता सूची में नाम जोड़ने के वक्त अपने ही बनाए दस्तावेज़ को अस्वीकार कैसे कर सकती है?
4 करोड़ बिहारी बाहर, क्या उनके लिए कोई योजना है?
तेजस्वी ने आयोग को आगाह करते हुए कहा कि बिहार के करीब चार करोड़ लोग कामकाज के सिलसिले में राज्य से बाहर रहते हैं। ऐसे में क्या 18 दिनों की समय-सीमा में वे सत्यापन करा पाएंगे? उन्होंने पूछा, “क्या सरकार की कोई योजना है कि इन प्रवासी बिहारी मतदाताओं को वोटर सत्यापन के लिए बिहार बुलाया जाएगा या फिर यह मतों की सफाई की एक सोची-समझी रणनीति है?”
फोटो-प्रमाण की शर्तें — ग़रीबों पर दोहरी मार
तेजस्वी ने मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को लेकर वित्तीय बोझ और प्रशासनिक जटिलताओं पर भी सवाल खड़े किए। “सफेद बैकग्राउंड वाली रंगीन फोटो, दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी — क्या हर परिवार के पास इसकी व्यवस्था है? क्या गरीब मतदाता फोटो स्टूडियो जाकर यह सब करवा पाएंगे?” उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया ग़रीब और ग्रामीण तबकों के साथ अन्याय है।
“Dashboard पर दें Live अपडेट, नहीं तो होगा जनांदोलन”
तेजस्वी ने चुनाव आयोग से मांग की कि यदि उनकी मंशा पारदर्शिता की है, तो उन्हें मतदाता सत्यापन की प्रति-दिन की स्थिति Dashboard पर Live अपडेट के रूप में सार्वजनिक करनी चाहिए — अब तक कितनों का सत्यापन हुआ, कितनों का नाम काटा गया और किन कारणों से।
“निर्वाचन आयोग संविधान के अधीन, न कि ऊपर”
तेजस्वी ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संस्था जरूर है, लेकिन वह “कानून के अधीन कार्य करता है, न कि कानून से ऊपर।” अगर 11 दस्तावेज़ों की सूची किसी आंतरिक गाइडलाइन या प्रशासनिक आदेश से बनाई गई है, तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर इस तरह हावी नहीं होने दिया जा सकता।
विपक्ष ने चेताया — नहीं मानी गई बात तो सड़क पर होगा संघर्ष
इंडिया गठबंधन ने साफ चेतावनी दी कि अगर आयोग गरीब, ग्रामीण और प्रवासी मतदाताओं के हित में पुनर्विचार नहीं करता और अन्य वैध दस्तावेज़ों को मान्यता नहीं देता, तो “जनता के अधिकार की रक्षा के लिए सड़क पर आंदोलन होगा।