एआई का नया रण: अमेरिका-ईरान प्रचार युद्ध में सच और झूठ की धुंध
अमर शर्मा, ओपिनियन (TWM News)

नई दिल्ली। आधुनिक युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों और हथियारों से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए भी लड़ा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टकराव अब एक डिजिटल प्रचार युद्ध में बदल चुका है, जहां सच और झूठ के बीच की रेखा लगातार धुंधली होती जा रही है।

आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जो पूरी तरह AI से निर्मित हैं। इनमें युद्ध के काल्पनिक दृश्य, फर्जी हमले और मनगढ़ंत सैन्य सफलताएं दिखाई जाती हैं, जिन्हें लाखों लोग वास्तविक मान लेते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस “सूचना युद्ध” में दोनों पक्ष AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, एक वायरल वीडियो में अमेरिकी युद्धपोत को नष्ट होते दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था। यह वीडियो करोड़ों बार देखा गया, जिससे गलत जानकारी का प्रभाव और गहरा हुआ।

AI तकनीक ने प्रचार को न सिर्फ तेज, बल्कि अधिक खतरनाक बना दिया है। अब केवल “डीपफेक” ही नहीं, बल्कि “शैलो फेक” जैसे नए रूप सामने आ रहे हैं, जहां असली वीडियो में मामूली बदलाव कर उसे भ्रामक बनाया जाता है। इससे आम लोगों के लिए असली और नकली में फर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है।

प्यू रिसर्च के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग यह पहचानने में असमर्थ हैं कि कौन-सी तस्वीर या वीडियो AI से बनी है, जिससे गलत सूचना का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

दरअसल, यह पूरा परिदृश्य बताता है कि अब युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन और एल्गोरिद्म के जरिए दिमागों पर भी लड़ा जा रहा है। AI के माध्यम से भावनाओं को भड़काना, नैरेटिव को नियंत्रित करना और वैश्विक जनमत को प्रभावित करना आसान हो गया है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष यह स्पष्ट कर रहा है कि भविष्य का युद्ध “इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर” का होगा, जहां असली हथियार डेटा और AI होंगे। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ युद्ध जीतना नहीं, बल्कि सच को बचाए रखना होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *