मोदी की ‘मेलोडी’ डिप्लोमेसी: इटली की पीएम मेलोनी को भेंट की भारतीय टॉफी, वैश्विक मंच पर गूंजा देसी स्वाद
विशेष लेख | अमर शर्मा
संपादन: निहाल दत्ता
नई दिल्ली/रोम।
जहां एक ओर बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान एक विज्ञापन के लिए 5 से 15 करोड़ रुपये तक लेते हैं और वैश्विक फुटबॉल आइकन क्रिस्टियानो रोनाल्डो 100 करोड़ से अधिक की फीस चार्ज करते हैं, वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साधारण ‘Melody’ टॉफी के जरिए ऐसा काम कर दिया, जो करोड़ों के विज्ञापन अभियान भी नहीं कर पाते।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘Parle Melody’ टॉफी भेंट कर मोदी ने न केवल एक दोस्ताना कूटनीतिक संदेश दिया, बल्कि भारतीय ब्रांड को वैश्विक मंच पर मुफ्त में ऐसी पहचान दिलाई, जो अभूतपूर्व है।
🍬 देसी टॉफी से ग्लोबल पहचान तक का सफर
मुंबई के विले पार्ले से शुरू हुई ‘Parle’ कंपनी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। 1929 में मोहनलाल चौहान द्वारा स्थापित यह कंपनी आज दुनिया के सबसे बड़े बिस्किट और कन्फेक्शनरी ब्रांड्स में शामिल है।
‘Parle-G’ से लेकर ‘Monaco’, ‘Krackjack’ और ‘Hide & Seek’ जैसे उत्पादों ने हर भारतीय घर में अपनी जगह बनाई। वहीं 1980 के दशक में आई ‘Melody’ टॉफी ने अपनी अनोखी कारमेल-चॉकलेट स्वाद से पीढ़ियों का दिल जीता।
📱 सोशल मीडिया पर ‘Melodi’ का जलवा
मोदी और मेलोनी के इस हल्के-फुल्के पल का वीडियो कुछ ही घंटों में 100 मिलियन से अधिक व्यूज पार कर गया। दोनों नेताओं के सोशल मीडिया फॉलोअर्स की संख्या 21 करोड़ से ज्यादा है—ऐसे में यह ‘अनजाना प्रमोशन’ एक ऐतिहासिक मार्केटिंग केस स्टडी बन गया।
#Melodi ट्रेंड करते ही मीम्स और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई, जिसने इस टॉफी को भारत से निकलकर यूरोप और दुनिया भर में चर्चा का विषय बना दिया।
📊 जहां विज्ञापन फेल, वहां कूटनीति पास
आज के दौर में एक इंस्टाग्राम पोस्ट के लिए सेलिब्रिटीज करोड़ों रुपये लेते हैं। ऐसे में दो देशों के प्रधानमंत्री द्वारा एक ब्रांड का जिक्र—वह भी बिना किसी भुगतान के—मार्केटिंग की दुनिया में ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बन गया है।
Parle Products के अधिकारियों ने भी इस पर खुशी जताते हुए कहा कि यह भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का एक शानदार उदाहरण है।