बैंक हड़ताल से थमा वित्तीय पहिया, जमालपुर में 100 करोड़ का कारोबार प्रभावित
चार श्रम संहिताओं और निजीकरण के खिलाफ AIBEA व अन्य यूनियनों का विरोध प्रदर्शन सफल

जमालपुर | 09 जुलाई 2025
केंद्र सरकार की श्रम नीतियों और तेज़ी से बढ़ते निजीकरण के खिलाफ बुधवार को जमालपुर में बैंक यूनियनों द्वारा आयोजित एकदिवसीय हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स यूनियन (AIBEUF) और बैंक एम्प्लॉइज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल में शहर के सभी बैंक शाखाएं और एटीएम पूरी तरह से बंद रहे।

AIBEA के सह-सचिव अंशुमान कुमार ने बताया कि सरकार की ओर से लाई गई चार नई श्रम संहिताएं पूरी तरह मजदूर विरोधी हैं और कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों को समाप्त करने की दिशा में एक खतरनाक कदम हैं। उन्होंने चेताया कि इन संहिताओं के लागू होने से सार्वजनिक संस्थानों के निजीकरण का रास्ता साफ हो जाएगा और यूनियनों के अधिकार भी समाप्त हो जाएंगे।

बढ़ती आउटसोर्सिंग पर चिंता
अंशुमान कुमार ने कहा कि बैंकों में स्थायी पदों को खत्म कर आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। 50% से अधिक बैंक शाखाओं में कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं है, जिससे बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती से न केवल उपभोक्ताओं की सेवाएं बाधित हो रही हैं, बल्कि फ्रॉड और साइबर अपराध की आशंका भी बढ़ती जा रही है। उन्होंने मांग की कि बैंकों में स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।

100 करोड़ से अधिक का लेन-देन ठप
हड़ताल के कारण शहर में बैंकिंग कार्य पूरी तरह ठप रहा। अनुमान के अनुसार जमालपुर में लगभग ₹100 करोड़ का वित्तीय लेन-देन प्रभावित हुआ। ग्राहकों को नकद निकासी, चेक क्लियरिंग, लोन से जुड़े काम और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए परेशान होना पड़ा।

आंदोलन को मिलेगी तेज़ी
बैंक यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर विचार नहीं किया, तो भविष्य में इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। यूनियनों ने सरकार से श्रम संहिताओं को रद्द करने, निजीकरण की प्रक्रिया को रोकने और बैंकों में नियमित भर्तियों की मांग दोहराई है।

बैंकों के बाहर सन्नाटा, ग्राहकों को भारी परेशानी
बुधवार को शहर के लगभग सभी बैंक शाखाएं और एटीएम शटर डाउन रहे। सुबह से ही बैंक आने वाले ग्राहकों को ताला लगे दरवाज़े और बंद बोर्ड का सामना करना पड़ा। कई वरिष्ठ नागरिक और छोटे व्यापारियों ने सेवाएं ठप होने पर नाराजगी जताई।

समाप्ति नहीं, शुरुआत है यह विरोध की – यूनियनों की चेतावनी
AIBEA सहित विभिन्न यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ शुरुआत है और यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो देशव्यापी स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की गरिमा को बनाए रखने की अपील की है।


रिपोर्ट – अमर शर्मा TWM न्यूज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *