भारतीय सेना का ड्रोन प्रहार: म्यांमार में उल्फा-आई के ठिकाने तबाह, शीर्ष कमांडर नयन असम ढेर
पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय सेना ने म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में एक अभूतपूर्व ड्रोन हमले को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में उल्फा-आई (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट) और एनएससीएन(के) के कई ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया गया। उल्फा-आई ने खुद स्वीकार किया है कि इस हमले में उनके शीर्ष नेता और पूर्वी कमान के प्रभारी नयन असम (असली नाम नयन मेधी) मारे गए हैं।
150 से अधिक ड्रोन, आधी रात का ऑपरेशन
सैन्य सूत्रों के मुताबिक यह अभियान रविवार तड़के 2 बजे से 4 बजे के बीच अंजाम दिया गया, जिसमें 150 से अधिक ड्रोन इस्तेमाल किए गए। यह हमला म्यांमार की सीमा के भीतर स्थित वकथम और होयाट बस्तियों पर केंद्रित था, जिन्हें उल्फा-आई का गढ़ माना जाता है। यह अभियान भारतीय सेना और म्यांमार की सेना के बीच समन्वय से संचालित हुआ।
नयन असम समेत कई बड़े नेता ढेर
उल्फा-आई द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि हमले में संगठन के 19 सदस्य घायल हुए हैं, जबकि नयन असम की मौके पर ही मौत हो गई। साथ ही, उनके अंतिम संस्कार के दौरान एक मिसाइल हमले में ब्रिगेडियर गणेश असम और कर्नल प्रदीप असम भी मारे गए। नयन असम संगठन के सैन्य प्रशिक्षण और रणनीति के प्रमुख माने जाते थे। उनके मारे जाने को संगठन के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश कनेक्शन की आशंका
इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI जनवरी 2025 से उल्फा-आई को समर्थन दे रही थी। 23 जनवरी को चिटगांव में उल्फा-आई नेता परेश बरुआ और आईएसआई अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी, जिसके बाद पाकिस्तानी हथियार म्यांमार के शिविरों तक पहुंचाए गए। इसके अलावा, कुछ बांग्लादेशी खाद्य कंपनियों द्वारा उल्फा-आई को वित्तीय मदद देने की बात भी सामने आई है।
गुवाहाटी में हुए थे धमाके
ज्ञात हो कि इसी वर्ष 26 जनवरी को उल्फा-आई ने गुवाहाटी में लालमती और रिहाबाड़ी इलाकों में दो छोटे स्तर के IED धमाकों को अंजाम दिया था। संगठन ने अगले दिन बयान जारी कर इसे गणतंत्र दिवस के खिलाफ ‘विरोध’ बताया था।
एनएससीएन(के) के ठिकानों पर भी कार्रवाई
इस ड्रोन ऑपरेशन में एनएससीएन(के) के कई ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, संगठन के कई सदस्यों की मौत हुई है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।
इजरायल और फ्रांस निर्मित ड्रोन का इस्तेमाल
सैन्य सूत्रों ने बताया कि इस ऑपरेशन में इजरायल और फ्रांस में निर्मित अत्याधुनिक ड्रोन का उपयोग हुआ, जिन्होंने सटीकता से लक्ष्य साधे। ऑपरेशन का केंद्र म्यांमार के नागा स्वशासित क्षेत्र की दुर्गम पहाड़ियां और घने जंगल थे।
नई सुरक्षा नीति का संकेत
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह ऑपरेशन केंद्र सरकार की नई और आक्रामक आतंक-रोधी नीति का हिस्सा है। म्यांमार की सीमा से सटे क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय उल्फा-आई और एनएससीएन(के) जैसे संगठनों को अब सुरक्षित पनाहगाह नहीं मिल रही।
(रिपोर्ट: विशेष संवाददाता, पूर्वोत्तर डेस्क | टीडब्ल्यूएम न्यूज़)