बिहार पुलिस की सख्त चेतावनी: बाल पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर कारावास और जुर्माना, सोशल मीडिया यूजर्स सावधान!

पटना, 25 जनवरी 2026: बिहार पुलिस ने बाल पीड़ितों (बच्चों और किशोरों) की पहचान गोपनीय रखने को लेकर एक बार फिर सख्त निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि POCSO एक्ट 2012 की धारा 23 और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 74 के तहत किसी भी बाल पीड़ित या किशोर की पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर करना गंभीर दंडनीय अपराध है।

बिहार पुलिस ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा है कि समाचार, पोस्ट, वीडियो, रील, थंबनेल, कैप्शन, बहस या कमेंट—सभी पर यह प्रतिबंध समान रूप से लागू होगा। यदि कोई व्यक्ति, संस्था, चैनल या प्लेटफॉर्म इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ निम्नलिखित कानूनी कार्रवाई की जाएगी:

– **कारावास**
– **अर्थदंड**
– आईटी अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत विधिक कार्रवाई

पुलिस ने सभी मीडिया और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को निर्देशित किया है कि वे:
– बाल पीड़ित की गरिमा, गोपनीयता और कानूनी अधिकारों का सम्मान करें।
– किसी भी प्रकार की अप्रमाणिक, सनसनीखेज या पहचान उजागर करने वाली सामग्री का प्रकाशन/प्रसारण न करें।

निषिद्ध सामग्री में शामिल हैं:
– पीड़ित का नाम
– पीड़ित की तस्वीर/वीडियो
– माता-पिता या अभिभावक का नाम
– पता, स्कूल, मोहल्ला या कोई अन्य पहचान योग्य विवरण
– सोशल मीडिया प्रोफाइल, स्केच, आवाज या कोई संकेत जिससे पहचान उजागर हो

बिहार पुलिस ने यह सूचना सार्वजनिक हित और विधिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जारी की है। उल्लंघन करने वाले स्वयं पूर्णतः उत्तरदायी होंगे।

यह बिहार पुलिस द्वारा जारी की गई महत्वपूर्ण अधिसूचना/सूचना पर आधारित है, जिसे उनके आधिकारिक X हैंडल (@bihar_police) से साझा किया गया है।

 

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