डुमरा में बाल कलाकारों का संविधान पर प्रहार, नुक्कड़ नाटक ने जगाई नागरिक चेतना
गणतंत्र दिवस पर ‘संविधान : अधिकार की दुकान’ के जरिए अधिकार-कर्तव्य का दिया सशक्त संदेश

डुमरा/सीतामढ़ी, 26 जनवरी।
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर डुमरा क्षेत्र के लौहडीह में बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक “संविधान : अधिकार की दुकान” ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन दिया, बल्कि उन्हें संविधान की आत्मा और नागरिक कर्तव्यों पर गंभीरता से सोचने के लिए भी प्रेरित किया। हास्य-व्यंग्य से भरपूर इस प्रस्तुति को लोगों ने खूब सराहा।

नाटक के माध्यम से यह सशक्त संदेश दिया गया कि वर्तमान समय में समाज का एक बड़ा वर्ग केवल अपने अधिकारों की बात करता है, जबकि कर्तव्यों से लगातार दूरी बनाता जा रहा है। बाल कलाकारों ने सरल भाषा और जीवंत अभिनय के जरिए यह स्पष्ट किया कि अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं तथा कर्तव्यों के बिना अधिकारों की कल्पना अधूरी है।

प्रस्तुति में झूठी राजनीति, भीड़ मानसिकता, मोबाइल की बढ़ती लत, अनुशासनहीनता और संस्कारों के ह्रास जैसे समकालीन सामाजिक मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया। बच्चों की संवाद अदायगी, सामूहिक अभिनय और मंचीय ऊर्जा ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

इस नुक्कड़ नाटक का लेखन एवं निर्देशन संस्थान के निदेशक मौर्य पिन्टु सिंह कुशवाहा ने किया। उनकी रचनात्मक दृष्टि ने संविधान के मूल मूल्यों को रोचक और जन-सुलभ रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों ने संविधान, संस्कृति और संस्कारों की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया।

नाटक में प्रियांशी, आशा, शिवानी, पूजा, चांदनी, दीव्या, अनीशा, मनीष, दिलीप, अंकित, प्रशांत, मुन्नी, काजल, रमन, मणि, नीतीश एवं पूजा सहित कई बाल कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को प्रभावशाली ढंग से निभाया।

स्थानीय नागरिकों, शिक्षकों और अभिभावकों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के नुक्कड़ नाटक समाज को जागरूक करने का सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम का समापन “जय संविधान, जय हिंद, जय भारत” के गगनभेदी नारों के साथ हुआ।

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