छठ महाव्रत के पहले छोटी पुल खोलने की मांग, दिसंबर में होगा महा आंदोलन
मुंगेर
जमालपुर के ऐतिहासिक रेल कारखाने और रेलवे इकाइयों के अस्तित्व को लेकर संघर्षरत विभिन्न संगठनों ने आगामी दिसंबर में महा रेल चक्का जाम का ऐलान किया है। इस आंदोलन की अगुवाई जमालपुर रेल निर्माण कारखाना संघर्ष मोर्चा कर रहा है, जिसने जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर इस बड़े आंदोलन की योजना बनाई है। मोर्चा का स्पष्ट संदेश है कि जमालपुर की आर्थिक धरोहर से छेड़छाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी।
संघर्ष मोर्चा की इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता जन सुराज के वरिष्ठ नेता दिनेश सिंह ने की, जबकि संचालन मोर्चा के संयोजक और सपा जिला अध्यक्ष पप्पू यादव ने किया। बैठक में मोर्चा ने रेलवे प्रशासन को चेताते हुए कहा कि रेल नगरी के विकास के साथ हो रहे खिलवाड़ का माकूल जवाब दिया जाएगा।
कारखाने के भविष्य पर गंभीर खतरा बैठक को संबोधित करते हुए दिनेश सिंह ने कहा, “जमालपुर रेल कारखाना और डीजल शेड, जो इस क्षेत्र की रीढ़ हैं, सरकार की उदासीनता के चलते अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। मोर्चा ने संकल्प लिया है कि इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।”
वहीं, मोर्चा के संयोजक पप्पू यादव ने कहा, “सरकार सिर्फ दिखावे के नाम पर कारखाने को झुनझुना पकड़ा रही है। लेकिन मोर्चा इस क्षेत्र के साथ हो रहे अन्याय का माकूल जवाब देने के लिए तैयार है।”
छठ महाव्रत से पहले छोटी पुल खोलने की मांग बैठक में शामिल मोर्चा के सह संयोजक और जदयू तकनीकी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष कन्हैया सिंह ने कहा, “यह कारखाना यहां की आर्थिक धरोहर है और इसके साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” मोर्चा ने छठ महाव्रत से पहले रेलवे प्रशासन से छोटी पुल खोलने की भी मांग की है, जिससे इस पर्व के दौरान लोगों को सहूलियत मिल सके।
दिसंबर में बड़ा आंदोलन, 17 नवंबर से सड़क पर उतरेंगे कार्यकर्ता
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि दिसंबर के दूसरे सप्ताह में महा रेल चक्का जाम किया जाएगा। इसके लिए 17 नवंबर से ही सड़क पर संघर्ष की शुरुआत होगी। मोर्चा ने सरकार और रेलवे प्रशासन को कड़ा संदेश दिया है कि अब इस क्षेत्र की उपेक्षा सहन नहीं होगी।
बैठक में सपा नेता मिथलेश यादव, जदयू नेता अमर शक्ति, डॉक्टर सुधीर गुप्ता, कॉमरेड दिलीप कुमार, रविकांत झा, नौशाद उस्मानी, मनोज क्रांति समेत कई वरिष्ठ नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।