किम जोंग उन की परमाणु शक्ति बनने की जुनून भरी जिद
लेखक – अमर शर्मा, अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ पत्रकार

उत्तर कोरिया और उसके सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की परमाणु महत्वाकांक्षा कोई नई बात नहीं है। बीते कई दशकों से प्योंगयांग का यही रुख रहा है कि परमाणु हथियार ही उसकी संप्रभुता और अस्तित्व की सबसे बड़ी गारंटी हैं। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र की पाबंदियां हों या पश्चिमी देशों का दबाव, किम जोंग उन की नीति कभी नहीं बदली।

हाल ही में किम ने फिर साफ कहा कि अमेरिका यदि “अवास्तविक जुनून” छोड़कर परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग करना बंद कर दे, तभी बातचीत संभव है। अन्यथा उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार किसी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। राज्य मीडिया ने उनके हवाले से बताया कि “प्रतिबंध हमारे लिए एक सीखने का अनुभव रहा है, जिसने हमें और मजबूत तथा आत्मनिर्भर बनाया है।”

प्रतिबंधों का असर नहीं

2006 से अब तक उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध और हथियार प्रतिबंध (arms embargo) लागू हैं। इसके बावजूद, प्योंगयांग ने 2006 से 2017 के बीच छह परमाणु परीक्षण किए और लगातार लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कीं। 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई ऐतिहासिक मुलाकातों और चर्चाओं के बावजूद, किम ने मिसाइल परीक्षण जारी रखकर यह स्पष्ट कर दिया कि वे किसी तरह के दबाव में झुकने वाले नहीं हैं।

परमाणु हथियार कानून और “अपरिवर्तनीय” निर्णय

साल 2022 में उत्तर कोरिया ने एक कानून पारित कर खुद को न्यूक्लियर वेपन स्टेट घोषित कर दिया। किम जोंग उन ने इसे “अपरिवर्तनीय” करार दिया और यहां तक कह दिया कि जरूरत पड़ने पर उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल (preemptive use) करने का भी अधिकार रखता है। यह कदम बताता है कि परमाणु हथियार उसके लिए केवल सुरक्षा कवच नहीं बल्कि अस्तित्व का मूलाधार बन चुके हैं।

सैन्य क्षमताओं का विस्तार

सितंबर 2024 में उत्तर कोरिया ने पहली बार अपने यूरेनियम संवर्धन संयंत्र की तस्वीरें जारी कीं। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता का विषय बना। साथ ही, हाल ही में किम ने ड्रोन और एआई तकनीक से सुसज्जित हथियारों के उत्पादन पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक से लैस हथियार उत्तर कोरिया की “रणनीतिक ढाल” को और मजबूत करेंगे।

परमाणु शस्त्रागार का अनुमान

अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी के अनुसार उत्तर कोरिया के पास परमाणु-युक्त बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें, मानवरहित ड्रोन और जासूसी उपग्रह तकनीक है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-Myung का अनुमान है कि उत्तर कोरिया हर साल 15–20 नए परमाणु वारहेड बनाने की क्षमता रखता है। वहीं, अमेरिकी कांग्रेस की Congressional Research Service की 2025 की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्योंगयांग अब तक इतना विखंडनीय पदार्थ बना चुका है जिससे लगभग 90 वारहेड तैयार किए जा सकते हैं, जिनमें से करीब 50 पहले से तैयार भी हो चुके हैं।

किम जोंग उन की परमाणु नीति स्पष्ट है – परमाणु हथियार उनका अस्त्र और अस्तित्व दोनों हैं। पश्चिमी प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय दबाव अब तक उन्हें नहीं रोक पाए हैं। बल्कि इन परिस्थितियों ने उत्तर कोरिया को और आत्मनिर्भर व आक्रामक बना दिया है। किम का मानना है कि केवल परमाणु हथियार ही अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ सबसे सशक्त डिटरेंस (निवारक शक्ति) हैं।

इसलिए सवाल यह नहीं है कि किम जोंग उन परमाणु हथियार क्यों चाहते हैं, बल्कि यह है कि विश्व समुदाय किस तरह इस “जुनून” और “दृढ़ निश्चय” को संतुलित कर शांति की राह निकाल पाएगा।

 

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