पटना में जापानी नाटक ‘आईना’ का सफल मंचन, मानवीय मनोविज्ञान और भ्रम की परतें खुलीं
रंगम संस्था की प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध, संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से प्रेमचंद रंगशाला में भव्य आयोजन
पटना, संवाददाता (अनिरुद्ध नारायण, इंटर्न):
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से पटना की प्रतिष्ठित नाट्य संस्था ‘रंगम’ द्वारा सोमवार को राजकीय प्रेमचंद रंगशाला (राजेन्द्र नगर) में मशहूर जापानी नाटककार चियोमी हारा के कालजयी नाटक ‘आईना’ का भव्य एवं सफल हिंदी मंचन किया गया। इस नाटक का हिंदी रूपांतरण अरुण चतुर्वेदी एवं तोमियो मिजोकामि ने किया, जबकि निर्देशन शहर के युवा रंगकर्मी रास राज ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें शहर के कई प्रमुख साहित्यकार, रंगकर्मी और कला समीक्षक उपस्थित रहे। मंचन के अवसर पर ध्रुव कुमार (प्रख्यात साहित्यकार), कुमारी वैष्णवी (राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी), वरुण कुमार (अध्यक्ष, कला प्रकोष्ठ, भाजपा), संजीत प्रकाश (समाजसेवी), मिथिलेश सिंह (वरिष्ठ रंगकर्मी), राजेश कुमार (समाजसेवी) एवं डॉ. पी.के. सुमन (हृदय रोग विशेषज्ञ) समेत कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

नाटक की कथा में छिपा गहरा संदेश
‘आईना’ एक पहाड़ी पृष्ठभूमि पर आधारित हास्य-व्यंग्य और मनोवैज्ञानिक नाटक है, जो एक भोले-भाले ग्रामीण परिवार की कहानी प्रस्तुत करता है। परिवार के सदस्य पिता (यासुके), माँ (मात्सु), बेटा (योइचि) और बेटी (सोदे) ने कभी आईना नहीं देखा होता। कहानी में मोड़ तब आता है, जब पिता शहर से एक जेबी आईना लाता है, जिसे वह जादुई वस्तु समझ बैठता है।
आईने में अपना ही प्रतिबिंब देखकर वह उसे अपने दिवंगत पिता का रूप मान लेता है। धीरे-धीरे परिवार के अन्य सदस्य भी उस आईने को देखते हैं और अपने-अपने भ्रम में उलझ जाते हैं। बेटी उसमें एक सुंदर लड़की देखती है, बेटा एक शिकारी, जबकि माँ उसे अपनी सौतन मान लेती है। इन अलग-अलग धारणाओं के कारण परिवार में अविश्वास और तनाव उत्पन्न हो जाता है।
निर्देशक की दृष्टि
निर्देशक रास राज के अनुसार, “यह नाटक केवल हास्य नहीं, बल्कि मानव मन की गहराइयों को दर्शाने वाला दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक प्रस्तुति है। आईना व्यक्ति की अधूरी इच्छाओं, असुरक्षाओं और अवचेतन भावनाओं को उजागर करता है।”
कलाकारों का प्रभावशाली अभिनय
नाटक में यासुके की भूमिका में कृष्णा किंचित, मात्सु के रूप में रेनू सिन्हा, सोदे के रूप में पूजा गुप्ता, योइचि के रूप में शिवम कुमार और शिकारी की भूमिका में स्वयं रास राज ने प्रभावशाली अभिनय किया।
मंचन और तकनीकी पक्ष
उद्घोषणा दीपक आनंद ने की, जबकि प्रकाश परिकल्पना राजीव रॉय की रही। संगीत संयोजन निहाल कुमार दत्ता ने किया। वस्त्र विन्यास पिंकू राज, मंच सज्जा एवं निर्माण में सुनील शर्मा, और रूप-सज्जा पूजा गुप्ता द्वारा किया गया। फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी का कार्य परमिंद्र सिंह सांघा और मनीष कुमार ने संभाला।
इस सफल आयोजन के लिए संस्था ने संस्कृति मंत्रालय, NCZCC प्रयागराज, प्रयास रंग अड्डा पटना, कृष्णा स्वीट्स, खान ग्लास, अतिथियों, दर्शकों और मीडिया का आभार व्यक्त किया।
नाटक के अंत में दर्शकों ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे विचारोत्तेजक और मनोरंजक बताया।
