पटना

बिहार की सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा ने संगीत की दुनिया को अलविदा कह दिया। गुरुवार सुबह गुलाबी घाट पर उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शारदा सिन्हा के बेटे अंशुमान ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों समेत बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक भी उपस्थित रहे। अंतिम यात्रा में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और पूर्व सांसद रामकृपाल यादव सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। बिहार सरकार ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि का आदेश जारी किया था।

शारदा सिन्हा के निधन पर फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। भोजपुरी सिनेमा के अभिनेता और नेता दिनेश लाल यादव निरहुआ ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा, “लोकप्रिय गायिका शारदा सिन्हा जी का निधन अत्यंत दुखद है। उनकी आवाज के बिना छठ पर्व अधूरा महसूस होता है।” वहीं, अभिनेता मनोज बाजपेयी ने एक्स पर लिखा, “शारदा जी ने अपने सुरों से भोजपुरी संगीत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।”

लोक गायकी की मनीषा

शारदा सिन्हा को उनके चाहने वाले ‘बिहार कोकिला’ और ‘मिथिला की बेगम अख्तर’ के नाम से भी पुकारते थे। मंगलवार रात दिल्ली के एम्स अस्पताल में 72 वर्षीय शारदा सिन्हा ने अंतिम सांस ली। अनुराग कश्यप, ऋचा चड्ढा, हुमा कुरैशी, सोनू निगम सहित कई अन्य हस्तियों ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

छठी मैया के सुरों की देवी

शारदा सिन्हा ने मैथिली, भोजपुरी और मगही में कई अमर गीतों को अपनी आवाज दी, जिनमें ‘छठी मैया आई ना दुआरिया’, ‘हो दीनानाथ’, ‘द्वार छेकाई’, और ‘पटना से’ जैसे लोकगीत प्रमुख हैं। इसके अलावा, हिंदी सिनेमा में भी उनका योगदान अविस्मरणीय है, जहाँ उन्होंने ‘तार बिजली’ (गैंग्स ऑफ वासेपुर), ‘कहे तो से सजना’ (मैंने प्यार किया) और ‘बाबुल’ (हम आपके हैं कौन) जैसे गीतों से श्रोताओं का मन मोह लिया।

अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

शारदा सिन्हा को अंतिम विदाई देने के लिए पटना के गुलाबी घाट पर जनसैलाब उमड़ा। उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए लोग उनकी अमर धरोहर और लोक संगीत के प्रति उनके समर्पण को याद कर भावविह्वल हो गए।

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