SIR पर बहस को लेकर राहुल गांधी का अमित शाह पर हमला, बोले- मोदी जी को भ्रमित मत कीजिए
केंद्रीय गृह मंत्री के बयानों का वीडियो साझा कर कांग्रेस नेता ने दी खुली बहस की चुनौती, कहा- किसी भी मंच पर और किसी भी समय तैयार हूं
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भ्रमित न करें, बल्कि उन्हें खुली बहस के लिए तैयार करें। राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमित शाह के दो अलग-अलग बयानों का वीडियो साझा करते हुए यह टिप्पणी की।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा, ”अमित शाह जी, मोदी जी को कन्फ्यूज मत कीजिए। बस उन्हें मेरे साथ खुली बहस के लिए मना लीजिए। कोई भी मंच, कोई भी समय। डरिए मत।”
अमित शाह के दो बयानों को लेकर उठाए सवाल
दरअसल, राहुल गांधी ने जिस वीडियो को साझा किया है, उसमें अमित शाह के संसद में SIR पर चर्चा को लेकर दिए गए दो बयानों को दिखाया गया है। राहुल के मुताबिक, 10 दिसंबर 2025 को संसद में वोट चोरी के आरोपों पर जवाब देते हुए शाह ने कहा था कि SIR पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती, क्योंकि यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का विषय है।
वहीं, 5 नवंबर 2026 को हरियाणा के करनाल में एक कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कहा कि सरकार SIR के मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा कराने के लिए तैयार है। राहुल गांधी ने इन दोनों बयानों को आधार बनाकर गृह मंत्री से सवाल किया है।
अमित शाह ने राहुल को संसद में चर्चा की दी थी चुनौती
इससे पहले अमित शाह ने करनाल में भाजपा के कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि यदि राहुल गांधी को SIR पर कोई सवाल या आपत्ति है, तो उन्हें संसद में आकर चर्चा करनी चाहिए। शाह ने विपक्ष पर सदन में हंगामा करने और राजनीतिक मुद्दों को सड़क पर ले जाने का भी आरोप लगाया था।
पीएम मोदी को भी दे चुके हैं खुली बहस की चुनौती
राहुल गांधी इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर खुली बहस की चुनौती दे चुके हैं। उन्होंने कहा है कि वह किसी भी मंच और किसी भी समय चर्चा के लिए तैयार हैं। कांग्रेस नेता ने बहस में मीडिया और युवाओं की मौजूदगी का प्रस्ताव भी रखा था।
SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी बयानबाजी ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की भूमिका को फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।