तेज प्रताप यादव की ‘पीली टोपी’ से बिहार की राजनीति में आया नया रंग
टीम तेज प्रताप का ऐलान, महुआ से निर्दलीय चुनाव की घोषणा, लालू परिवार से बढ़ी दूरी
✍️ शिवांशु सिंह | विशेष राय, TWM NEWS
पटना, 27 जुलाई —
बिहार की राजनीति में रंगों की अपनी एक खास पहचान रही है। लालू प्रसाद यादव की पार्टी RJD की हरी टोपी एक समय पूरे राज्य में बदलाव और सामाजिक न्याय का प्रतीक मानी जाती थी। लेकिन अब वही हरी टोपी, लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के सिर से उतरकर जगह बना रही है एक पीली टोपी को। और यही पीली टोपी आज बिहार की राजनीति में नए सियासी संकेतों की सबसे बड़ी कहानी बन गई है।
तेज प्रताप यादव, जिन्हें कभी लालू की राजनीतिक विरासत का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता था, अब ‘टीम तेज प्रताप यादव’ के बैनर तले एक नया सियासी अध्याय शुरू करने की ओर बढ़ चले हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में वैशाली जिले की महुआ सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरेंगे। यह वही सीट है जहां से उन्होंने अपना पहला चुनाव जीता था।
पीली टोपी: सिर्फ रंग नहीं, एक राजनीतिक प्रतीक
तेज प्रताप यादव का हरी टोपी को छोड़ पीली टोपी पहनना कोई साधारण रंग परिवर्तन नहीं है। यह एक राजनीतिक और वैचारिक विद्रोह का संकेत है। जानकार मानते हैं कि यह बदलाव न सिर्फ पार्टी से उनकी नाराजगी दर्शाता है, बल्कि उनके भीतर उपजे आत्मसम्मान के संघर्ष और नेतृत्व की महत्वाकांक्षा को भी उजागर करता है।
तेज प्रताप ने RJD के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और अपने ही परिवार के कई सदस्यों को अनफॉलो कर दिया है। साथ ही ‘टीम तेज प्रताप यादव’ का झंडा और नया पीला गमछा जारी कर यह साफ कर दिया है कि अब वे RJD के नेतृत्व के अधीन नहीं रहना चाहते।
निष्कासन और नया मंच
तेज प्रताप यादव को हाल ही में पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। इसका कारण उनके निजी जीवन से जुड़ा अनुष्का यादव प्रकरण बताया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह निष्कासन तेजस्वी यादव और तेज प्रताप के बीच लंबे समय से चली आ रही अंतर्कलह का अंतिम पड़ाव माना जा रहा है।
इसी निष्कासन के बाद तेज प्रताप ने हरी टोपी का त्याग कर पीली टोपी का चयन किया, जिसे कुछ लोग उनके धार्मिक और सांस्कृतिक झुकाव—खासकर भगवान कृष्ण से जुड़ाव—का प्रतीक भी मानते हैं। तेज प्रताप पहले भी श्रीकृष्ण के रूप में अपनी सार्वजनिक छवि को प्रस्तुत करते रहे हैं।
टीम तेज प्रताप: नई पार्टी नहीं, ओपन प्लेटफॉर्म
तेज प्रताप यादव का कहना है कि ‘टीम तेज प्रताप यादव’ कोई राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक ओपन प्लेटफॉर्म है जो युवाओं, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर काम करेगा। लेकिन उनके इस मंच को लेकर जानकारों की राय है कि यह रणनीति आगे जाकर एक नए राजनीतिक दल में परिवर्तित हो सकती है।
उनका यह दावा भी चर्चा में है कि वे निर्दलीय चुनाव लड़कर RJD के उम्मीदवार को हराने में सक्षम हैं। यह बयान RJD नेतृत्व के लिए एक खुली चुनौती माना जा रहा है।
RJD के लिए अंदरूनी संकट?
तेज प्रताप के इस विद्रोह से RJD को न सिर्फ संगठनात्मक झटका लग सकता है, बल्कि यादव मतदाता वर्ग में भी भ्रम की स्थिति बन सकती है। इससे विरोधी दलों—खासकर भाजपा और जदयू—को फायदा पहुंच सकता है जो RJD के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तेज प्रताप की ओर से एक ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ की रणनीति भी हो सकती है, ताकि भविष्य में किसी सियासी सौदेबाज़ी में वे खुद को एक उपयोगी और शक्तिशाली मोहरे के रूप में पेश कर सकें।
बिहार की राजनीति का अगला अध्याय?
तेज प्रताप यादव के इस सियासी बदलाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव 2025 केवल दलों के बीच नहीं, बल्कि परिवारों के अंदर भी संघर्ष की तस्वीर पेश करेंगे। यह भी तय है कि तेज प्रताप की यह नई रणनीति बिहार के सियासी रंगमंच को और भी ज्यादा जटिल, रोचक और संभावनाओं से भरपूर बना देगी।
🟡 राय लेखक: शिवांशु सिंह, TWM NEWS के राजनीतिक विश्लेषक एवं संपादकीय सलाहकार हैं। वे बिहार की क्षेत्रीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर विशेष दृष्टिकोण रखते हैं।