चुनाव आयोग की दो दिवसीय बैठक शुरू: पूरे देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर मंथन
राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ समीक्षा, दिसंबर 2025 तक विशेष पुनरीक्षण की तैयारी

नई दिल्ली। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने बुधवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक की शुरुआत की। इस बैठक में देशभर के राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) शामिल हुए हैं। बैठक का मुख्य एजेंडा है — पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत मतदाता सूचियों का व्यापक सुधार और अद्यतन सुनिश्चित करना।

बैठक की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की, जबकि निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. वीनीत जोशी भी मौजूद रहे। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और उप-निर्वाचन आयुक्तों ने भी इसमें भाग लिया।

आयोग के सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में उन कार्यों की समीक्षा की जा रही है जो 10 सितंबर को हुई पिछली बैठक में राज्यों को सौंपे गए थे। उस समय आयोग ने SIR प्रक्रिया की रूपरेखा तय की थी। अब राज्यों से यह रिपोर्ट ली जा रही है कि उन्होंने कितनी प्रगति की है और किन बिंदुओं पर काम शेष है।

बैठक का पहला सत्र बुधवार दोपहर शुरू हुआ और गुरुवार सुबह के सत्र के बाद इसका समापन होगा। आयोग इस दौरान SIR प्रक्रिया के लिए ठोस लक्ष्य और समयसीमा तय करेगा।

सूत्रों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को देशभर में 2025 के अंत तक लागू करने पर विचार किया जा रहा है। आयोग इस बात पर भी चर्चा करेगा कि इसे एक चरण में पूरे देश में किया जाए या दो चरणों में, ताकि मौसम, कृषि कार्य और परीक्षा कार्यक्रम जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा सके।

यह पहल सामान्य वार्षिक या चुनाव पूर्व सारांश पुनरीक्षण से भिन्न है। इसमें पूरी मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन, सुधार और अद्यतन किया जाएगा ताकि कोई भी पात्र नागरिक सूची से वंचित न रहे और कोई भी फर्जी प्रविष्टि न रहे।

गौरतलब है कि जून 2025 में आयोग ने बिहार से इस प्रक्रिया की शुरुआत करने की घोषणा की थी, क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव निकट हैं। हालांकि, इस फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी और इसे “वोट चोरी की तैयारी” बताया था।

निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि सटीक मतदाता सूची बनाए रखना संवैधानिक दायित्व है और इसका उद्देश्य केवल पारदर्शी व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।

 

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