दीवाली पर बिकी 6 लाख करोड़ की वस्तुएं: घरेलू उत्पादों और जीएसटी सुधारों ने बढ़ाई रौनक
स्थानीय बाजारों में फिर लौटी रौनक, 50 लाख अस्थायी रोजगार भी सृजित
नई दिल्ली। इस साल की दीवाली देश के व्यापार जगत के लिए ऐतिहासिक साबित हुई। व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक, इस बार देशभर में कुल 6.05 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिक्री हुई है। इसमें 5.40 लाख करोड़ रुपये का व्यापार वस्तुओं में और 65,000 करोड़ रुपये सेवाओं के क्षेत्र में हुआ।
व्यापारियों का कहना है कि इस बार की जबरदस्त बिक्री के पीछे मुख्य कारण जीएसटी सुधार, जरूरी वस्तुओं की सस्ती दरें, और स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ी उपभोक्ता रुचि रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का भी बाजारों पर स्पष्ट असर दिखाई दिया।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये अधिक बिक्री हुई है। 2024 में जहां व्यापार आंकड़ा 4.25 लाख करोड़ रुपये पर था, वहीं इस साल यह बढ़कर 5.40 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
CAIT की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 60 प्रमुख वितरण केंद्रों, राज्य की राजधानियों और द्वितीय-तृतीय श्रेणी के शहरों में किए गए सर्वे में पाया गया कि 72 प्रतिशत व्यापारियों ने बिक्री बढ़ने का श्रेय जीएसटी दरों में कमी को दिया।
खास बात यह रही कि पारंपरिक बाजारों और गैर-कॉर्पोरेट व्यापारियों का दबदबा कायम रहा। उन्होंने कुल व्यापार का 85 प्रतिशत हिस्सा संभाला, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत के स्थानीय बाजार फिर से मजबूती के साथ उभर रहे हैं।
ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों ने भी इस बार कुल व्यापार में 28 प्रतिशत की भागीदारी दर्ज की, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सक्रियता को दर्शाता है।
CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भारतीया ने बताया कि सेवा क्षेत्र ने 65,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। इसमें पैकेजिंग, आतिथ्य, टैक्सी सेवाएं, यात्रा, आयोजन प्रबंधन, टेंट-सज्जा, डिलीवरी और मानव संसाधन जैसी सेवाएं शामिल हैं।
इसके साथ ही, इस व्यावसायिक उछाल से 50 लाख अस्थायी रोजगार भी सृजित हुए, जिनमें लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, परिवहन और रिटेल सेवाएं शामिल हैं।
मुख्य क्षेत्रवार बिक्री प्रतिशत इस प्रकार रहा:
- किराना और एफएमसीजी: 12%
- सोना-आभूषण: 10%
- इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स: 8%
- उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं: 7%
- रेडीमेड वस्त्र: 7%
- उपहार सामग्री: 7%
- होम डेकोर: 5%
- फर्नीचर और फर्निशिंग: 5%
- मिठाई और नमकीन: 5%
- वस्त्र एवं कपड़े: 4%
- पूजन सामग्री: 3%
- फल एवं मेवे: 3%
व्यापारियों को उम्मीद है कि यह उत्सव का सिलसिला आगामी विवाह और मकर संक्रांति के मौसम तक जारी रहेगा, जिससे खुदरा बाजारों में रौनक बरकरार रहेगी।