खगड़िया में नहीं हो सकी तेजस्वी यादव की रैली, प्रशासनिक अनुमति रद्द होने पर भड़के विपक्षी दल
खगड़िया। बिहार विधानसभा चुनाव के बीच खगड़िया में शनिवार को उस वक्त सियासी माहौल गर्म हो गया जब महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव की प्रस्तावित सभा को प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। तेजस्वी की रैली संसारपुर खेल मैदान में होनी थी, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के चलते प्रशासन ने इसे रद्द कर दिया।
प्रशासन की इस कार्रवाई से आरजेडी और उसके सहयोगी दलों में गहरी नाराज़गी है। खगड़िया सदर से कांग्रेस प्रत्याशी चंदन यादव ने इसे लोकतंत्र के साथ “तानाशाही रवैया” बताते हुए कहा कि प्रशासन बीजेपी के दबाव में काम कर रहा है। उनके मुताबिक, “हमारे आवेदन को पहले मंजूरी दी गई थी, लेकिन देर रात अचानक अस्वीकृत कर दिया गया। यह विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश है।”
बताया जा रहा है कि प्रशासन ने पत्र जारी कर कहा कि गृहमंत्री अमित शाह का जेएनकेटी मैदान में कार्यक्रम पहले से तय था और सुरक्षा कारणों से दूसरे बड़े राजनीतिक आयोजन की अनुमति देना संभव नहीं है।
रैली रद्द होने के बाद भी तेजस्वी यादव ने खगड़िया जिले में दो स्थानों पर प्रचार अभियान जारी रखा। गोगरी में आयोजित सभा में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “जब अमित शाह कहते हैं कि बिहार में उद्योग के लिए जमीन नहीं है, तो फिर वोट मांगने क्यों आते हैं?”
उन्होंने परबत्ता से आरजेडी प्रत्याशी डॉ. संजीव कुमार और अलौली से उम्मीदवार रामवृक्ष सदा के लिए जनता से समर्थन की अपील की। तेजस्वी ने कहा कि “अगर बिहार को नया रास्ता देना है तो खगड़िया की चारों सीटों पर महागठबंधन को जिताना होगा।”
सभा स्थगित किए जाने पर तेजस्वी ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “देश के गृहमंत्री के हैलीकॉप्टर के लिए इतनी सख्ती क्यों? विपक्ष की सभा रद्द कर लोकतंत्र की मर्यादा को ठेस पहुंचाई गई है। चुनाव आयोग को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।”
खगड़िया में तेजस्वी की सभा रद्द होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। महागठबंधन इसे प्रशासनिक पक्षपात बता रहा है, जबकि एनडीए नेताओं का कहना है कि यह सुरक्षा और व्यवस्थागत कारणों से लिया गया निर्णय था। चुनावी माहौल में इस घटनाक्रम ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।