मिग के परे देखें: वायुसेना की ताकत बढ़ाना वक्त की जरूरत
By – Amar Sharma
सशस्त्र सेनाओं के नेतृत्व के लिए आधुनिक हथियारों की खरीद में हो रही अनावश्यक देरी बेहद निराशाजनक साबित हो रही है। भारतीय वायुसेना (IAF) के शीर्ष अधिकारी बार-बार स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ की डिलीवरी में हो रही विलंब का मुद्दा उठा चुके हैं। यह तब और अहम हो जाता है जब चीन अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण की रफ्तार तेज कर चुका है। चिंता की बात यह है कि 2009–2010 में ऑर्डर किए गए पहले 40 तेजस हल्के लड़ाकू विमान (LCA) का पूरा बेड़ा अब तक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने सौंपा ही नहीं है।
मिग-21 का अंत, नई चुनौतियाँ
सोवियत काल के मिग-21 विमानों के पूरी तरह रिटायर होने के बाद भारतीय वायुसेना की घटती ताकत फिर चर्चा में है। मिग-21 के बेड़े से बाहर होने के बाद IAF के पास अब केवल 29 स्क्वाड्रन बचे हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। पाकिस्तान के पास लगभग 20–25 स्क्वाड्रन और चीन के पास 60 से अधिक स्क्वाड्रन मौजूद हैं। एक स्क्वाड्रन में 16–18 विमान होते हैं।
2035 तक जगुआर और मिराज-2000 जैसे पुराने विमानों के भी चरणबद्ध रूप से रिटायर होने की उम्मीद है, जिससे वायुसेना की ताकत और घट सकती है। इसलिए नए विमानों की खरीद और तैनाती में तेजी लाना बेहद जरूरी है।
‘तेजस’ की सुस्त रफ्तार
तेजस परियोजना की शुरुआत 1984 में मिग-21 को बदलने के उद्देश्य से हुई थी। लेकिन बार-बार की देरी ने इसे दशकों तक अटका दिया। पहला तेजस विमान 2001 में उड़ा और 2016 में वायुसेना में शामिल हुआ।
रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 83 Mk1A तेजस विमानों की आपूर्ति के लिए 48,000 करोड़ रुपये का करार किया था। मार्च 2024 से डिलीवरी शुरू होनी थी और हर साल 16 विमान दिए जाने थे। लेकिन अब तक एक भी Mk1A वायुसेना को नहीं मिला।
विदेशी इंजन पर निर्भरता
तेजस का सबसे बड़ा संकट इसका विदेशी इंजन पर निर्भर होना है। अगस्त 2021 में HAL ने GE एयरोस्पेस से 99 F-404 इंजन खरीदने का ऑर्डर दिया था। पहला इंजन अप्रैल 2025 में भारत आया और दूसरा इस महीने की शुरुआत में मिला है। अब 97 और तेजस विमानों के लिए करीब 67,000 करोड़ रुपये की डील की तैयारी है। HAL ने उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर हर साल 24 विमान बनाने का भरोसा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिस रफ्तार से तकनीक बदल रही है, उस हिसाब से जब तक आखिरी Mk1A वायुसेना में शामिल होगा, तब तक उसकी प्रासंगिकता कम हो सकती है।
रक्षा कंपनियों के लिए सबक
तेजस की कहानी रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के लिए कड़ा सबक है। उन्हें अपनी कार्यक्षमता बढ़ानी होगी और निजी कंपनियों की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी। अनुसंधान और विकास (R&D) पर अधिक निवेश की भी जरूरत है।
हाल ही में संसद की स्थायी रक्षा समिति ने HAL को तेजस के उत्पादन में तेजी लाने और फाइटर जेट की खरीद प्रक्रिया को गति देने का सुझाव दिया है। वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने भी HAL की सुस्त कार्यशैली की आलोचना की है।
दीर्घकालिक योजनाएँ
IAF ने अगले दो दशकों में 600 से अधिक लड़ाकू विमानों के बेड़े का रोडमैप तैयार किया है। इनमें शामिल हैं:
- 180 LCA Mk1A
- 120 से अधिक LCA Mk2
- 114 MRFA
- कम से कम 120 AMCA
इसके अलावा नौसेना के लिए ट्विन-इंजन डेक आधारित फाइटर जेट पर भी काम चल रहा है।
इन महत्वाकांक्षी योजनाओं की सफलता समय पर उत्पादन और डिलीवरी पर निर्भर करेगी। चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों के बीच वायुसेना की ताकत में हो रही कमी को पाटना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।